कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में एडीएम की बदसलूकी से आहत होकर रो पड़ी बुजुर्ग महिला

एडीएम कुमार सत्यम की बदसलूकी से रो पड़ी बुजुर्ग महिला_आँसू देखकर भी नहीं पसीजे लाट साहब_ग्वालियर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में नजर आई संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

महानगर बनते ग्वालियर में अब तक कई कलेक्टर आए कई अधिकारी आए और हजारों की संख्या में नेता भी आते हैं। लेकिन जनता के मुँह पर जनता को बुरा भला कहने वाला शायद ही आपने देखा होगा। आज हम आपको ऐसे ही एक संवेदनहीन लाट साहब से मिलाने जा रहे हैं जो गलती से जनसुनवाई में बैठ गए और जो आया उसे हड़काते नजर आए। वहीं शिकायतों की बात करें तो आधी से ज्यादा शिकायतें अनसुनी ही रह गईं। मीडिया को भी इन लाट साहब ने कवरेज करने से मना कर दिया। अब पता नहीं लाट साहब के मन में क्या था कि ग्वालियर की बेहद संवेदनशील महिला  कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान की गैरमौजूदगी में अपनी व्यथा सुनाने आई महिला को चुप रहने का फरमान सुना डाला एक बार नहीं बार बार। अपने इस अपभान से आहत हुई इस महिला की आँखें भर आईं। वो तो भला हो कनिष्ठ कर्मचारियों का कि उन्होना इंसान को इंसान समझा और उस महिला को दूर ले गए। आज कलेक्टर जनसुनवाई में अपर कलेक्टर कुमार सत्यम ने अपने आस पास किसीको बैठाना मुनासिब नहीं समझा। जबकि ग्वालियर कलेक्टर रूचिका सिंह चौहान हमेशा अपने मातहतों को अपने साथ बैठाती हैं ताकि नागरिकों की समस्याओं का तत्काल प्रभाव से निरकारण हो सके।

हम आपको कुछ तस्वीरें दिखाएँगे एक कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान द्वारा पूर्व में ली गई जनसनवाई की

 

दूसरा आज लाट साहब (माफ कीजिए) एडीएम कुमार सत्यम द्वारा ली जा रही जनसुनवाई का इसके बाद आप तय कर पाएँगे कि क्यों एक जनता का नौकर जनता को दुत्कारता है उसका अपमान करता है और उसे अपना जरखरीद गुलाम समझता है।

इनमें से एक तस्वीर वो है जब एडीएम एक बजे से पहले ही अपना सिंहासन छोड़कर चल दिए। दूसरी तस्वीर उस समय की  है जब एडीएम कुमार सत्यम के चले जाने के बाद जनता की सुनवाई करने वाले निचले स्तर के अधिकारी कर्मचारियों ने जनता को अगली बाय आने और कुछ को एसपी ऑफिस जाने की सलाह दे डाली। क्योंकि उनके मुताबिक उनके मामले कलेक्टर के जूरिक्डिक्शन में नही आते और तो और कुछ लोगों का आवेदन तक लेने से इनकार कर दिया गया।

 

एक ऐसा अफसर जो मीडिया से इरिटेट होता है, एक ऐसा नौकरशाह जो जनता को अपना गुलाम समझता है, इसकी संवेदनहीनता की हद उस समय पार हो जाती है जब एक फ़रियाद लेकर रोती हुई आई बुजुर्ग महिला की फरियाद से उसे चिढ़ होती है। जी हाँ हम बात कर रहे ग्वालियर कलेक्ट्रेट में पदस्थ एक बेहद संवेदनहीन एडीएम कुमार सत्यम की जो आज ग्वालियर कलेक्टर की गैर-मौजूदगी में जनसुनवाई में जनता की समस्याओं के निराकरण करने का दिखावा करने पहुँचे। हालांकि वे जनसुनवाई के पहले ही वे जनता से मुँह मोड़कर सभागार से चलते बने। बुजुर्ग महिला की सुनवाई नहीं होनी थी जो नहीं हुई। ऐसे में सवाल उठता है कि आम जनता के टैक्स के पैसे से ऐशो आराम करने वाले ये निरंकुश नौकरशाह जनता की कद्र कब करेंगे।

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