मनुस्मृति पुराणों से भी प्राचीन_इसका विरोध करना गलत_कौशिक जी महाराज

मनुस्मृति सनातन धर्म प्रमाणित है_ये था है और रहेगा कौशिक महाराज 

 

एंकर-: ब्राह्मण धरती पर नहीं रहेगा तो सब कुछ समाप्त हो जाएगा ब्राह्मणों ने इस देश‌ को संस्कार दिए उन्होंने कभी किसी का‌ कुछ नहीं बिगाड़ा ये कहना‌ है देश‌ के प्रख्यात कथावाचक मनीषी कौशिक का। बता दें कि ग्वालियर में शिवमहापुराण के‌ भव्य आयोजन के अवसर पर पधारे मनीषी कौशिक महाराज ने देश‌ में मनुस्मृति के खिलाफ चल‌ रही अफवाहों और प्रोपगंडा को पूरी तरह निराधार बताया। उनका कहना है सनातन धर्म अनादि अनंत है जब कोई नहीं था उस समय सनातन धर्म था और कोई नहीं रहेगा तब भी सनातन धर्म रहेगा कोई कितनी भी ऊंगलियां उठा ले ये खत्म नहीं हो सकता। क्योंकि मरता वो है जो पैदा होता है। मनुस्मृति हमारे पुराणों से भी पुराना ग्रंथ है। यह अनादिकाल का ग्रंथ है इसमें जितनी भी बातें हैं सब प्रमाणित हैं इसमें राजा कैसा‌ होना चाहिए प्रजा कैसी होनी चाहिए नारी का सम्मान भी हमें मनुस्मृति ने ही सिखाया। जब वर्ण व्यवस्था नहीं थी उस समय से मनुस्मृति है । मनु महाराज जाति से बहुत ऊपर हैं उनकी कोई जाति नहीं थी ब्रह्माजी ने‌ अपने शरीर को दो भागों में बाँटा। एक भाग स्त्री और एक भाग से पुरुष। पुरुष मनु महाराज और स्त्री वो माता शतरूपा हैं तो हमारे चौथे वर्ण के महानुभावों को बिल्कुल किसी प्रकार की टीका टिप्पणी नहीं करना चाहिए।

पेड़ के नीचे बैठने से बीमारियां नहीं होतीं, पेड़ों की छांव में आयु में वृद्धि होती है इसलिए हमें वृक्ष लगाने चाहिए, प्राचीन काल में भारी तादाद में वृक्ष नदियां पहाड़ थे तो लोग भी स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे थे। आपने बैड लकड़ी के बिछाए हैं आपके घर के दरवाजे भी लकड़ी के हैं लेकिन आप कभी पेड़ो नहीं लगाते और तो और अब पेड़ों को‌ काटा जा रहा है तो स्वस्थ जीवन कैसे जिएंगे। ये कहना है ग्वालियर में शिव महापुराण की कथा में पधारे मनीषी कौशिक महाराज का। कौशिक महाराज गौवंश‌‌ की रक्षा के लिए समाज और देश से आह्वान किया है कि इंटरकास्ट मैरिज से ब्राह्मण ठाकुरों‌ की संख्या घट रही है ब्राह्मणों और ठाकुरों द्वारा अंतर्जातीय विवाह होने‌ के चलते वो हमारे समाज का विघटन हो रहा‌ है इसे रोकना चाहिए। मनुस्मृति का समर्थन करते हुए मनीषी कौशिक जी कहते हैं कि मनु स्मृति में जिन राज काज की नीतियों का वर्णन किया गया है उसके आधार पर साम दाम दण्ड भेद का अनुसरण सभी करते हैं। नारी तत्र पूज्यंते रमंते तंत्र देवता भी मनुस्मृति का ही कहना है। लेकिन कुछ लोग मनुस्मृति को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा‌ करते हैं।

बाइट-: मनीषी‌ कौशिक जी महाराज (कथावाचक, शिवमहापुराण)

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