सीजन में पहली बार खुले तिघरा के गेट_
चार हजार क्यूसेक पानी की बर्बादी
ग्वालियर,सीजन में पहली बार ग्वालियर की लाइफलाइन तिघरा जलाशय के तीन गेट खोल दिए गए हैं। ग्वालियर के नागरिकों को पानी देने वाले एकमात्र पेयजल स्रोत तेघरा का निर्माण सिंधिया रियासत काल में देश के प्रसिद्ध इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के निर्देशन में कराया गया था अपने निर्माण के 100 वर्षों बाद भी तिघरा ग्वालियर शहर के लोगों की प्यास बुझा रहा है। बारिश के इस सीजन में पहली बार तिगरा का जलस्तर 738 फुट से ज्यादा होने पर तिघरा के तीन गेट खोल दिए गए हैं। प्रशासन द्वारा 4000 क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ने से पहले आसपास के गांव को अलर्ट जारी कर दिया गया था वहीं एसडीआरएफ की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।संभावित हादसों की आशंका को दृष्टिगत रखते हुए तिघरा जाने वाले सैलानियों को सतर्क कर दिया गया है। यहाँ अहम बात यह है कि सौ वर्ष से ज्यादा पुराने जलाशय की गहराई को अब तक बढ़ाया नहीं गया है और न ही इसकी सफाई की गई है यही वजह है कि हर वर्ष लाखों क्यूसेक पेयजल बर्बाद हो रहा है। तिघरा जलाशय और कैचमेंट एरिया में जमी गाद के चलते पानी कि बर्बादी रोकने की कोई भी योजना प्रशासन या जल संसाधन विभाग के पास नहीं है।
