BJP का BJP के खिलाफ हल्लाबोल_शंकराचार्य भी UGC के खिलाफ_सड़कों पर उतरा सवर्ण समाज
देश भर में यूजीसी द्वारा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जारी इक्वैलिटी बिल को लेकर आक्रोश है और यह आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। एक ओर जहाँ सवर्ण तबका यूजीसी और केंद्र सरकार के खिलाफ लामबंद हो चुका है वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य जैसे हिन्दुओं के सबसे बड़े धर्मगुरु भी इसके खिलाफ बयानबाजी करने में पीछे नहीं हैं। हालांकि इस सबके बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस बिल पर अस्थाई रोक के बाद भी गुस्साए भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूरी भारतीय जनता पार्टी को ही सवर्ण विरोधी करार दे दिया है और बिल वापस न होने की दशा में भाजपा को तिलांजलि देने का मन बना रहे हैं। वरिष्ठ भाजपा नेताओं और सत्ता संगठन की इस बिल पर हैरतनाक चुप्पी से असमंजस में आए जमीनी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जो कार्यकर्ता पार्टी को बना सकता है वही पार्टी को बिगाड़ भी सकता है।
आइए आपको बताते हैं कि यूजीसी आज सबसे ज्यादा चर्चा में क्यों है और क्या है ये बखेड़ा
यूजीसी का पूरा नाम है यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन अर्थात विश्वविद्यालय अनुदान आयोग जो पूरे देश की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए अनुदान और संरक्षण प्रदान करता है। लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार की वह पर देश में पहली बार यूजीसी ने देश के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले एससी-एसटी ओबीसी स्टूडेंट्स के हितों को सुरक्षित रखने और उन्हें भेदभाव से बचाव के लिए प्रमोशन ऑफ इक्वैलिटी रेगुलेशन लागू किया है। यूजीसी के मुताबिक इस नियम में एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के स्टूडेंट्स के साथ होने वाले भेदभाव पर रोक लगेगी, लेकिन देश भर में सवर्ण समाज के लोगों और तमाम बुद्धिजीवियों द्वारा इस बिल को सवर्ण समाज के खिलाफ साजिश करार दिया है।
इन विनियमों में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए समानता को बढ़ावा देने हेतु कई अनिवार्य प्रावधान शामिल किए गए हैं: भेदभाव विरोधी प्रकोष्ठ: संस्थानों को जाति, धर्म, लिंग या विकलांगता के आधार पर भेदभाव से संबंधित शिकायतों को संभालने के लिए एक समर्पित प्रकोष्ठ स्थापित करना होगा। यूजीसी के नए बिल के अनुसार हर शैक्षणिक संस्थानों में प्रमोशन ऑफ इक्वैलिटी रेगुलेशन कमेटी में एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के ही सदस्य रखें जाएंगे, वहीं कथित पीड़ित छात्र द्वारा की गई झूठी शिकायत पर भी उसके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं होगी
इसी तरह के कुछ रेगुलेशन के खिलाफ देश भर में सवर्ण संगठन सरकार और यूजीसी का विरोध कर रहे हैं। हालांकि कोर्ट ने यूजीसी के इस बिल पर अस्थाई तौर पर रोक लगा दी है। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद स्वर्ण संगठनों में थोड़ी सी उम्मीद जगी है की न्याय होगा लेकिन कहीं पिछली बार की तरह कहीं फिर से केंद्र की भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ अध्यादेश ले आती है तो देश में एक बार फिर से वर्ग संघर्ष की स्थिति देखने को मिल सकती है।
