आखिर क्यों टूटती हैं महापुरूषों की प्रतिमाएँ_
सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की कौन कर रहा साजिश_
वर्ग संघर्ष से किसे होगा लाभ_समाज को बाँटने की साजिश में अंबेडकर क्यों बन रहे निशाना
सामाजिक सौहार्द्र को खंडित करने की साजिशों में कौन लोग शामिल हैं कौन महापुरुषों का अपमान कर रहा है और क्यों। ये सवाल तब उठता है जब ग्वालियर के चंद असामाजिक तत्व लगातार ऐसे महापुरुषों को निशाना बना रहे हैं जो अब नहीं हैं। जो अपने ऊपर लगे आरोपों का गवाब नहीं दे सकते लेकिन वे एक बड़े वर्ग के प्रेरणास्त्रोत जरूर हैं जिसके चलते उनकी प्रतिमाओं के साथ छेड़छाड़ होते ही तत्काल एक तबका उग्र हो जाता है। और हो भी क्यों न जिसे हम पूजते हैं जिसे अपना सर्वस्व मानते हैं उसका अपमान किसीकी भी स्वीकार नहीं होगा। इन दिनों बहुजन समाज के मसीहा माने जाने वाले डॉ अम्बेडकर की मूर्तियों को तोड़ने की खबरें आ रही हैं जिसके चलते ग्वालियर चम्बल अंचल का सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।म देखिए ये विशेष खबर।
ग्वालियर के बिलौआ में संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। प्रतिमा के तोड़फोड़ करने की सूचना मिलने पर पहुंचे बहुजन समाज के प्रमुख नेता रूपेश केन ने तमाम कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर धरना दे दिया और मांग की कि जिन असामाजिक तत्वों ने संविधान निर्माता की मूर्ति का अपमान किया है उन्हें तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार किया जाए। वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन ने अंबेडकर की क्षतिग्रस्त मूर्ति को कवर कर दिया है। बता दें कि ग्वालियर जिले की डबरा ब्लॉक के बिलौआ में जाटव मोहल्ला स्थित अंबेडकर पार्क में वर्षों पूर्व डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को स्थापित किया गया था। बहुजन नेता रूपेश केन ने प्रशासन से नई प्रतिमा लगाने के साथ ही प्रतिमा को खंडित करने वालों के खिलाफ बाबा साहब के अपमान को लेकर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो बहुजन समाज द्वारा सड़कों पर उतर कर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। अंचल में जिस तरह से महापुरुषों के अपमान की घटननाओं से सामाजिक सद्भाव और शांति को खत्म किया जा रहा है उससे लगता यही है कि आने वाला समय शासन और प्रशासन के साथ समाज को भी बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है जिससे असामाजिक तत्वों को करारा जबाब मिले और इस तरह की साजिशों का खुलासा हो सके।
