
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ये साबित कर दिया कि उनका हाथ और साथ पूरी तरह से भू माफियाओं कंस्ट्रक्शन माफियाओं और समाज में जितने भी माफिया पनपते हैं इन सबके साथ है। क्योंकि ग्वालियर में सैंकड़ों लोगों को बेघर करके फरार हुआ बिल्डर मोहन बांदिल बीते सोमवार मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होता नजर आया, जबकि गोल्डन टॉवर नामक रेत के घरौंदे नुमा बिल्डिंग में रहने वाले पीड़ितों के मुताबिक मोहन बांदिल ने खुद को बीमार घोषित करते हुए हॉस्पिटल में भर्ती दर्शाया था, जैसे ही एक निजी अखबार में शहर से फरार मोहन बांदिल की तस्वीरें नजर आईं तो गोल्डन टॉवर में अपना आशियाना खरीद कर ठगे गए रहवासियों को पता चल गया कि भैया अब तो मोहन मोहन की शरण में चला गया है ये वही मोहन हैं जो देश के सबसे कथित ईमानदार और अब तक के सबसे कथित सुसभ्य मुख्यमंत्री माने जाते हैं!
इस वीडियो में आपको आशियाना गंवा चुके लोगों का दर्द नजर आएगा..
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वीओ -: इन दिनों मध्यप्रदेश भू माफियाओं और अवैध बिल्डरों के लिए स्वर्ग बना हुआ है मध्यप्रदेश के नागरिकों की जान से खिलवाड़ करने वालों को अवार्ड मिलता है, प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव का अवैध टाउनशिप और मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने वाले भू माफियाओं से खासा लगाव है यही वजह है कि पिछले दिनों ठाठीपुर इलाके के गोल्डन टॉवर के घटिया निर्माण के चलते चर्चाओं में आए बिल्डर और राजनीतिक रसूख वाले माफिया मोहन बांदिल को स्वयं मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने अपने हाथों से पुरस्कृत किया,
आपको बता दें कि ये वो मोहन बांदिल है जिसने गोल्डन टॉवर में रहने वाले 27 परिवारों को बेघर करने के साथ उनके जीवनभर की कमाई से खरीदे गए सपनों के आशियाने के साथ बड़ी ठगी को अंजाम दिया है, हादसे के बाद अब तक ये बिल्डिंग माफिया किसीके सामने नहीं आया है गोल्डन टॉवर में अपना घर गंवा चुके लोगों की मानें तो इसकी तबियत खराब थी और हॉस्पिटल में भर्ती था लेकिन मुख्यमंत्री के हाथों अवार्ड लेने की तस्वीरों ने ग्वालियर नगर निगम और प्रशासन के महाभ्रष्ट अधिकारियों की पोल खोल कर रख दी है, बहरहाल बिल्डिंग का पिलर टूटने के बाद अपना अपना हिस्सा लेकर सारे अधिकारियों ने अपने आँख कान और मुँह बंद कर लिया है एक बड़ा वाला चांदी का जूता स्थानीय नेताओं के मुँह पर भी मारा गया है क्योंकि जरा सी बात पर सड़क पर उतरने वाले नेताओं ने भी अपने मुंह बिल लिए हैं और वैसे भी सैंया भए मुख्यमंत्री तो डर काहे का क्योंकि कांग्रेस की महापौर भी इस संबंध में बोलने से बच रही हैं।
