यहाँ जनता के पैसे से जनता की ही सुपारी दी जाती है…

विकास की भेंट चढ़ता नौजवान,2-3 साल के लिए आने वाले अफसरों ने ग्वालियर को बना दिया प्रयोशाला….

ग्वालियर स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन और नगर निगम द्वारा शहर में ‌किए जा रहे लगातार प्रयोगों के कारण कई लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं लेकिन बावजूद इसके न तो निगम प्रशासन और न ही स्मार्ट सिटी की आंखें खुली हैं, यहाँ आम जनता के टैक्स के पैसे से ही उसकी मौत का सामान तैयार करने‌ वाले अफसर और सरकारों की आँखों की पट्टी हटने‌का नाम नहीं ले रही पिछले दिनों एक युवा पत्रकार भी ऐसे ही सीवर चैम्बर में गिरकर अपनी‌ जान गंवा बैठा था।
ग्वालियर में जनता के बेहतर सुविधाओं का दावा करने वाली नगर निगम और स्मार्ट सिटी जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी के साथ उसकी मौत का सामान तैयार करने में जुटे हैं, दो तीन साल‌ के लिए आने‌ वाला हर अधिकारी शहर में अपने हिसाब से प्रयोग करता है विकास के नाम पर पैसा बर्बाद करने के नए नए तरीके निकालता है और अपना कमीशन लेकर चलता बनता है, यह परिपाटी सालों से‌ चलती आ रही है और इसके चलते सैंकड़ों लोग मौत के गड्ढों में समा चुके हैं।

देखिए You Tube वीडियो…

ताज़ा मामला ग्वालियर के आनंद नगर में रोड का है जहाँ रात को मजदूरी कर लौट रहे एक नौजवान की अमृत योजना के तहत बीच सड़क पर खोले गए गड्ढे में गिरने से मौत हो गई और एक युवक‌ गंभीर रूप से घायल हो गया, इस दुर्घटना में नगर निगम के एमआईसी सदस्य और पार्षद शकील मंसूरी के भांजे को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, मौके पर पहुँचे स्थानीय पार्षदों ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, यहाँ पिछले तीन साल से लाइट बंद है, स्मार्ट सिटी ने लाखों करोड़ों की लागत से बिजली के खंबे तो लगा दिए लेकिन उनमें न स्ट्रीट लाइट है और न ही बिजली, कारण पूछने पर निगम का कहना है कि बिजली कंपनी की हाईटेंशन लाइन ऊपर से गुजर रही है इसलिए यहाँ ट्रिपिंग की समस्या के चलते स्ट्रीट लाइट नहीं जल सकती तो सवाल ये है कि जनता के टैक्स के पैसे से इस तरह के प्रयोग किए ही क्यों जाते हैं, क्या उन अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जिन्होंने बिना किसी कार्ययोजना और सर्वे के खंबे लगाकर जनता का पैसा बर्बाद किया है, पैसे के इस खेल में अधिकारी और नेताओं को केवल कमीशन से मतलब है हालांकि इस तरह की दुर्घटनाओं में ठेकेदार भी उतने ही दोषी हैं जितने नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अफसर लेकिन जिम्मेदारी लेने के बजाय ये लोग एक दूसरे विभाग पर आरोप प्रत्यारोप लगाते नजर आते हैं लेकिन ये संवेदनहीन सिस्टम उस पिता के आँसू कैसे पोंछेगा जिसने अपने बेटे को खो दिया,
उस 5 माह की बेटी को क्या कहेगा जिसने अपने पिता का चेहरा भी नहीं देखा उस पत्नी को क्या देगा जिसके सामने दो बच्चों की‌ जिम्मेदारी के साथ पति की मौत का सदमा कई बरसों तक रुलाता रहेगा…???

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