
देखिए वीडियो में कि क्यों गुस्सा हैं लोग, दिल से निकली दर्दभरी हाय किसे लगेगी….?
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ग्वालियर में भांजे ने शहर की जीवनदायिनी स्वर्णरेखा नदी को अपनी महत्वाकांक्षाओं के चलते मौत के घाट उतार दिया और उसी भांजे के दिवंगत मामा जो संवेदनशीलता की मिसाल थे उनके नाम पर साँसें छीनी जा रहीं हैं और हाँ ये हम नहीं कह रहे ये बयान कर रहीं हैं ये तस्वीरें जो अंधे विकास का पर्याय बन चुकी हैं ग्वालियर के एकमात्र सिटी फॉरेस्ट सिरौल के हजारों पेड़ों की हत्या की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है और ये उन सरकारों द्वारा लिखी गई है जिन्हें हमने वोट दिया है सत्ता सिंहासन पर बिठाया है और अब ये हमारे ही पैसे से हमारी और हमारे बच्चों की साँसें छीनने पर अमादा हैं।
अब ये मोर नहीं नाचेंगे अब ये पक्षी भी यहाँ कलरव नहीं करेंगे और न ही यहाँ कोई चिड़िया चहचहा पाएगी क्योंकि इन मासूम निर्दोष पशु पक्षियों के लिए देश में कोई संविधान नहीं है और न ही इनकी कोई सुनने वाला है क्योंकि ये बोल नहीं सकते।
जो बोल सकते हैं वो बोलेंगे नहीं क्योंकि सरकारों का आदेश है जो सिर उठेगा काट दिया जाएगा यहाँ पेड़ पौधों को दरख़्तों को बढ़ने की इजाजत नहीं है क्योंकि जो पेड़ बड़ा होगा उसकी साँसें छीन ली जाएँगी।
ग्वालियर के सिरौल के सिटी फॉरेस्ट में वर्षों पहले लगाए गए पेड़ों को काटने का आदेश जारी कर दिया गया है क्योंकि यहाँ देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का स्मारक बनना है, यहाँ ऑडिटोरियम, म्यूजियम कैफेटेरिया कवि गोष्ठी हॉल, गेस्ट हाउस और इसके साथ ही पेड़ों की हत्या कर सांस्कृतिक और अनुसंधान करने के लिए इमारतें और पक्की सड़क तैयार की जाएंगी, लेकिन कोरोनाकाल में करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी साँसों के लिए जद्दोजहद करने वाले लोगों की साँसों के लिए स्वच्छ वातावरण और साफ हवा नहीं मिलेगी,क्योंकि ग्वालियर का एकमात्र ऑक्सीजन जोन अब नहीं रहेगा।
सबसे अहम बात कि यहाँ रहने वाले हजारों लाखों पक्षियों के आशियाने उजाड़ कर सरकारें उस महान आत्मा के स्मारक का निर्माण कर रही हैं जो अपनी संवेदनशीलता और इंसानियत के लिए पूरे विश्व में जानी जाती थी,
कुछ लोग कहते भी हैं कि इसे देखकर अटल जी की आत्मा रो रही होगी,
जिन्होंने इन पेड़ों को बच्चों की तरह पाला बड़ा किया वे इतने अधिक आक्रोशित हैं कि कहते हैं कि भस्मासुर होते तो सबको भस्म कर देता,
यही बात पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष राज चड्ढा भी कहते हैं की तप से राज मिलता है और राज से नर्क मिलता है तो आप समझ सकते हैं कि जब ये इतने गुस्से में हैं तो जिनका आशियाना उजाड़ा जा रहा है उन निर्दोष बेजुबान पशु पक्षियों की आह कितनी भयानक होगी ये स्वार्थ में डूबी सरकारें और प्रशासनिक अफसर नहीं समझ सकते।
