पुलिस का डंडा नहीं मेहनत भी देखिए…

ये भी पुलिस है….

यकीनन पुलिस का यह वीडियो देख आपके हाथ सैल्यूट के लिए खुद ब खुद उठ पड़ेंगे।

आम जनता में पुलिस की छवि अक्सर उनकी अक्खड़ पन वाली भाषा और डंडे के जोर पर नियम कानून का पालन करवाने की रही है और हो भी क्यों न वीआईपी मूवमेंट के दौरान लगातार 14-16 घंटों की ड्यूटी किसी‌ को भी चिड़चिड़ा बनाने के लिए पर्याप्त है, वहीं बेवजह नियम कानून तोड़ने का शौक रखने‌ वाले आम लोग भी पुलिस की ड्यूटी में बड़ी बाधा उत्पन्न करते हैं लेकिन यहाँ हम आपको पुलिस का एक ऐसा चेहरा दिखाने जा रहे हैं जो संवेदनशील होने के साथ मददगार भी नज़र आता है।

ये ग्वालियर पुलिस है, जहां एक अकेले सिपाही ने ऑटो चालक की मदद की है
ग्वालियर के लश्कर क्षेत्र में रामदास घाटी पर लोहे के भारी जंगले ले जा रहा लोडिंग ऑटो ज्यादा वजन के चलते दो पहियों पर खड़ा हो गया जिससे उसमें लदे सभी एंगल सड़क पर गिर पड़े, चालक को भी मामूली चोटें आई, लोडिंग ऑटो को हवा में देखकर भी राहगीरों ने ड्राइवर की मदद नहीं की, पास ही मौजूद पुलिस चौकी पर तैनात आरक्षक पवन सेंगर को जैसे ही जानकारी मिली तत्काल प्रभाव से ट्रेफिक को नियंत्रित करते हुए गाड़ी को खड़ा‌ करने की कोशिश की, हालांकि पवन सेंगर को ऑटो चालक की मदद करते देख कोई भी राहगीर उनकी मदद को आगे नहीं आया, ये हमारे शहर की संवेदनहीनता का एक बड़ा उदाहरण है,
एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सिपाही ने‌ अन्य लोगों की मदद से ऑटो को सुरक्षित खड़ा किया, यहाँ देखने वाली बात ये थी कि सिपाही जब अकेला था तो अपनी ड्यूटी का बहाना बनाकर मौके से निकल सकता था क्योंकि भारी एंगलों से भरी गाड़ी को खड़ी करना उसका काम नहीं था लेकिन पुलिस की ड्यूटी के साथ इंसानियत का फर्ज निभाने वाले पुलिस आरक्षक ने बता दिया कि पुलिस ऐसी भी होती है। ऐसे पुलिस बालों के लिए समाज सेवी संस्थाओं को आगे आना चाहिए और उनको सम्मानित कर उनकी हौसला अफजाई करनी चाहिए जिससे पुलिस के सभी जवानों में अपनी ड्यूटी के साथ साथ इंसानियत भी जाग सके।

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