क्या मीडिया को वाकई जूते पड़ने वाले हैं….?

ग्वालियर के सुप्रसिद्ध समाजसेवी संवेदनशील, सहृदय सुसंस्कारी मुसीबत में पड़े लोगों को आसरा और उनकी भोजन व्यवस्था करने जैसा महत्वपूर्ण कार्य करके मुख्यमंत्री के हाथों पुरस्कृत होने वाले ऐसे हमारे शहर की नामचीन हस्ती मोहन बांदिल ने एक अरसे बाद सामने आकर गोल्डन टॉवर मामले में उन्हें बदनाम करने वाली प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का खुलासा किया है। वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपने उन व्यवसाई प्रतिद्वंद्वियों को भी जवाब दिया जिन्होंने उनकी ज़रा सी गलती को राई का पहाड़ बना दिया जो उनकी थी ही नहीं।हालांकि इस 19 मिनट के वीडियो में उन्होंने अपने ऊपर नहीं किए गए किसी भी एफआईआर या कोर्ट केस का जिक्र भी किया है
छिछोरे पत्रकार और ब्लैकमेलर अखबार अधिकारियों पर बना रहे दबाव

जिसके बाद उनके कथित समर्थक या कहें उनके द्वारा उपकृत लोगों ने उनके फेसबुक मीडिया के लिए छिछोरे ब्लैकमेलर जैसी शानदार टिप्पणियां और झूठी खबरें छापने वाले अखबारों के खिलाफ लीगल कार्रवाई करने के साथ जूते मारने की भी बात कही है। इसके अलावा कुछ मीडियाई जमात वाले भी यहाँ मोहन की मनमोहक झांकी से मोहित होकर अपनों के ऊपर ही टिप्पणी करने से बाज नहीं आ रहे।

वैसे भैया अपन तो कुछ नहीं कहते क्योंकि बड़े बिल्डर हैं बड़े लोग हैं हो सकता है कि जब सीएम को खरीद लिया तो पुलिस प्रशासन और नगर निगम की क्या औकात।
वैसे भी पत्रकारों का क्या है दो हड्डी डाल दोगे तो चुपचाप बैठे रहेंगे क्योंकि कार्रवाई तो प्रशासन को करनी है और प्रशासन मुख्यमंत्री का गुलाम है और मुख्यमंत्री किसी के गुलाम नहीं वो राजा हैं पूरे प्रदेश के…. और जब राजा ही पुरस्कार दे रहा हो तो भैया अपन कौन हैं मीडिया क्या है केवल माध्यम मात्र… तो बस निकल गई भड़ास।

क्योंकि सास भी कभी बहू थी आगे आप समझदार हैं।
