ग्वालियर में कलेक्ट्रेट पहुँचे शराबी ने शराब को आधार से लिंक करने दिया आवेदन_अधिकारी रह गए भौंचक्के
शराब का नाम सुनते ही कई लोगों के मुँह में पानी आ जाता है, बहुत से लोग तो शराब पीने के लिए अपने परिवार और दोस्तों को छोड़ देते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसा मामला बताने जा रहे हैं जो आपको हैरान कर देगा। दरअसल ग्वालियर के कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुँचे एक भूतपूर्व शराबी ने शराब से तौबा करने की कसम खाई है और यही नहीं उसने कलेक्टर को लिखे अपने आवेदन पत्र में शराब बिक्री पर आधार कार्ड से लिंक करवाने की गुहार लगाई है।
भूतपूर्व शराबी की मांग-आधार कार्ड से मिले मजदूरों को शराब,600 कमाता है 400 शराब में उड़ा देता है,टोकन नम्बर 154 नाम से कलेक्टर को दिया आवेदन अधिकारियों से लेकर सोशल मीडिया पर सुर्खियों में आया
एंकर- ग्वालियर कलेक्टर की जनसुनवाई में एक अजीबो गरीब आवेदन आया। इस आवेदन को जिस भी अधिकारी ने पढ़ा उसके होश उड़ गए। आवेदन नम्बर 154 के जरिये मांग की गई कि मध्यप्रदेश में कामगार मजदूर को आधार कार्ड के जरिये ही दुकान से शराब मिले। यदि यह नियम लागू हो जाये तो मजदूर के घरवालों के लिए हर दिन दीपावली और हर दिन ईद की तरह होगा। यह आवेदन शराब छोड़ चुका एक मजदूर देने पहुंचा था।
वीओ-: मध्य प्रदेश के अलग-अलग विभागों की हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में यूं तो बहुत से शिकायती आवेदन आते हैं।लेकिन ग्वालियर कलेक्टर की जनसुनवाई में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया,जहां एक शराब छोड़ चुका मजदूर पहुंचा। उसे टोकन नम्बर 154 मिला। लंबे इंतजार के बाद जब उसका नम्बर आया तो वह जनसुनवाई में मौजूद अधिकारी SDM विनोद सिंह के पास आवेदन लेकर पहुंच गया। अधिकारी ने जैसे ही आवेदन पड़ा तो वह हैरान हो गए। तत्काल आबकारी विभाग के अधिकारी को बुलाया और आवेदन पर चर्चा के निर्देश दिए। आबकारी विभाग के अधिकारी ने जब उस आवेदनकर्ता से बातचीत की तो उसने बताया कि उसका नाम राजेन्द्र कुमार निवासी गोल पहाड़िया है। राजेंद्र ने यह भी बताया कि वह पेशे से मजदूर है। और शराब छोड़ चुका है। ऐसे में वह भूतपूर्व शराबी है। आवेदन के जरिये मजदूर राजेन्द्र ने आबकारी अधिकारी को बताया कि एक आम मजदूर हर रोज मजदूरी कर 600 रुपये कमाता है।लेकिन जगह जगह मिलने वाली शराब को वह पीने का आदि हो गया है।600 रुपये मेसे वह रात तक 400 रुपये के लगभग की शराब पी जाता है। उसके घर वालो को बड़ी मुश्किल से 200 से 100 रुपये मिल पाते है। जिससे घर चलना बहुत मुश्किल होता है। इस पीड़ा से सबक लेकर उसने शराब पीना छोड़ दिया। ऐसे में सभी मजदूरो की शराब की लत को छुड़ाने के लिए एक नियम बना दिया जाए। जिसके तहत मजदूर शराबी को आधार कार्ड के जरिये ज्यादा से ज्यादा 02 शराब के क्वार्टर ही मिले। यदि ऐसे सख्त नियम बना दिये जायें तो मजदूर शराब पीना कम करेंगे। जिससे उस मजदूर के परिवार को कमाई के 600 रुपये मेसे कम से कम 400 रुपये बचेंगे। कलेक्टर महोदया आवेदन पर गौर करते हुए मध्यप्रदेश शासन को पत्र लिखकर उस पर संज्ञान ले।यदि यह व्यवस्था लागू हो जाये तो उम्मीद है कि मजदूर के परिवार के लिए हर दिन दीपावली और हर दिन ईद की तरह होगा। मजदूर के आवेदन को सूनने के बाद आबकारी अधिकारी ने आश्वासन दिया कि उसके आवेदन की जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी। जिसके बाद मजदूर को रवाना कर दिया।
बाइट- राजेन्द्र कुमार- आवेदनकर्ता
