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आपको पकड़ने वाली पुलिस खुद अपराधी है_देखिए बड़ा खुलासा

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निर्दोष पुलिस कर्मी दर दर भटक रहे_अपराधी पुलिस कर्मी मौज मजे की ड्युटी पर तैनात कर रहे वसूली

ग्वालियर में एक पुलिस आरक्षक अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर अपने बच्चों के साथ आत्महत्या करने को मजबूर है। ग्वालियर पुलिस का सबसे बड़ा सिरदर्द अपराधी नहीं है चोर लुटेरे हत्यारे तो बिल्कुल नहीं है और न ही वो सफेदपोश जो करोड़ों रुपयों के घोटाले करते हैं पुलिस का सबसे बड़ा सर दर्द ऐसे पुलिस वाले हैं जिन पर दर्जनों अपराध दर्ज हैं लेकिन वह राजनीतिक रसूख और कमाऊ पूत होने के चलते उच्च अधिकारियों के काबू में नहीं है। आज हम आपको कुछ ऐसे ही अपराधी पुलिस कर्मियों के बारे में बताएंगे जो दर्जनों अपराध करके भी खुले घूम रहे हैं या फिर अपने राजनीतिक आकाओं के दम पर पुलिस में पूरे ठाट बाट से जमे हुए हैं। एसपी की बात तो जाने दीजिए खुद आईजी में भी इनके ऊपर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है।

ऐसा ही एक मामला सामने आया जब एक पुलिस कर्मी ने पुलिस विभाग में हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदीप सिंह जादौन नामक कर्मचारी का कहना है कि ग्वालियर पुलिस में आधा सैकड़ा से अधिक अपराधी पुलिसकर्मी नौकरी कर रहे हैं। इन अपराधी पुलिसकर्मियों में टीआई से लेकर आरक्षक तक शामिल है अपने राजनीतिक रसूक और वरिष्ठ अधिकारियों से मिली भगत के चलते यह अपराधी होकर भी धड़ल्ले से पुलिस विभाग में नौकरी कर रहे हैं। ऐसा ही एक आरक्षक है देवेश पचौरी जिसकी भर्ती फर्जी रूप से हुई है इसके खिलाफ एसटीएफ ने एफआईआर भी दर्ज की है, इस आरक्षक के खिलाफ गंभीर धाराओं में आधा दर्जन मामले दर्ज हैं बावजूद इसके यह अपने राजनीतिक रसूख के चलते अधिकारियों की नाक के नीचे नौकरी कर रहा था। हालांकि एक माह पहले पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने के बाद आरक्षक देवेश पचौरी को लाइन भेज दिया गया है। लेकिन वर्तमान में वह विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की सुरक्षा में तैनात है। प्रदीप सिंह जादौन को एसटीएफ ने देवेश पचौरी का सॉल्वर बना कर उस पर भी एफआईआर कर दी अब खुद को बेदाग बता रहे प्रदीप जादौन का कहना है कि जब आधा सैकड़ा पुलिस कर्मी अपराधी होने के बाद भी अपनी नौकरी कर रहे हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकता मेरे पास परिवार सहित आत्मह्त्या करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।

अहम बात है कि जब पुलिस महकमे के थाना प्रभारी से लेकर आरक्षक तक पुलिसकर्मी खुद ही अपराधी हैं तो मोहन सरकार के अपराध मुक्त प्रदेश की परिकल्पना कैसे पूरी होगी।

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