जनता से परेशान कलेक्टर ने बंद करवाए दरवाजे

फरियादियों के मुँह पर प्रशासन ने बंद किए दरवाजे,
यही रवैया लोगों को मरने पर कर रहा मजबूर।
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जनता द्वारा दिए गए टैक्स से तनख्वाह पाने वाले अधिकारियों का रवैया जनता के प्रति कितना संवेदनहीन है ये आज हम आपको बताने जा रहे हैं, सरकार द्वारा अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने के तमाम दावे और वादों की पोल में अधिकारी ही खोलते नजर आते हैं जब अपनी गुहार सुनाने के लिए लोगों को आत्महत्या तक करने पर मजबूर होना पड़ता है, ग्वालियर कलेक्ट्रेट में होने वाली जनसुनवाई में अपनी गुहार सुनाने के लिए जान से हाथ धोना पड़ता है, हालांकि इस बार अपने ऊपर कैरोसिन डालकर पीने वाली महिला को बचा लिया गया लेकिन ऐसे कितने फरियादी और पीड़ित हैं जिनकी सुनवाई तक नहीं होती और अधिकारी अपने कानों में रूई डालकर सो जाते हैं, यही नहीं जब जनता कलेक्टर यानि कथित रूप से जिले के सबसे जिम्मेदार अधिकारी कलेक्टर के सामने अपनी शिकायत लेकर जाती है तो उनके सभी दरवाजे बंद मिलते हैं बड़ा सवाल यह है अब हर कोई तो आत्मदाह नहीं कर सकता न तो कलेक्टर समेत तमाम प्रशासनिक अफसर भी जनता की तरफ से पूरी तरह उदासीन नजर आते हैं।
कई बार लगाई गुहार पर नहीं सुनती सरकार जी हाँ ये हम नहीं कह रहे ये ग्वालियर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में थोड़ी देर से पहुँचे फरियादियों की पुकार है जो वे सरकार शासन प्रशासन से कर रहे हैं, और जब पीड़ित की सुनी नहीं जाती तो इस तरह के मामले सामने आते हैं जैसा आज कलेक्ट्रेट में कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान के सामने हुआ।
दबंगों से पीड़ित महिला ने कलेक्टर समेत तमाम अधिकारियों की मौजूदगी में खुद पर कैरोसिन उड़ेल दिया और आत्मदाह करने की कोशिश की, गनीमत रही कि समय रहते सुरक्षा कर्मियों ने महिला‌ को बचा लिया, हालांकि इससे पहले भी ऐसी घटना इसी सभागार में हो चुकी है जिसमें पीड़ित को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है, लेकिन अधिकारियों बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता वैसे इस तरह की घटनाएं बहुत सारे सवाल छोड़ जाती हैं जिनका जवाब किसी के पास नहीं है,
पीड़ित महिला द्वारा खुद पर कैरोसिन डालने का डर कहें या फरियादियों की बढ़ती संख्या से परेशानी कलेक्टर के केबिन में जाने के सभी दरवाजे पूरी तरह बंद दिखाई दिए, अपना काम धाम छोड़कर इस उम्मीद में अपनी शिकायत कलेक्टर को देने आए कि हमारी आवाज कोई तो सुनेगा लेकिन दर्जनों फरियादी कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान के केबिन के बाहर खड़े नजर आए, वे दरवाजे खटखटाते रहे लेकिन उनका अंतहीन इंतजार खत्म नहीं हुआ और वे मायूस होकर वापस रवाना हो गए, फरियादियों और पीड़ितों की बढ़ती भीड़ से परेशान होकर कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान पिछले दरवाजे से निकल गईं थीं….
देखिए शासन प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती यह रिपोर्ट

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