
_GRMC के तुग़लक़ का नफरती फरमान…_
क्या गजराराजा मेडिकल कॉलेज के नवनियुक्त डीन को पत्रकार और पुलिस से इतनी नफ़रत है कि समाज और लोकतंत्र की सुरक्षा करने वाले पुलिस और पत्रकारों को ये फूटी आँख देखना पसंद नहीं करते, या फिर कारण कोई और है, इस नफरती फरमान के पीछे का सच क्या है…?
देखिए वीडियो….
_क्या डीन GRMC को अपनी जागीर समझ बैठे हैं…?_
GRMC की डॉक्टर लॉबी इतनी पॉवरफुल है कि ये की बार प्रशासन के साथ शासन पर भी हावी हो चुकी है, शायद यही वजह है कि डीन इस पॉवरफुल लॉबी के दम पर पुलिस और पत्रकारों से अपनी कोई पुरानी खुन्नस निकालना चाह रहे हों, हालांकि बेचारी पुलिस तो हमेशा से ही डॉक्टर लॉबी के दबाव में रही है नहीं तो पिछले कई सालों से JAH में लगातार कुटते पिटते और डॉक्टरों के बेवजह गुस्से का शिकार होते मरीज और उसके परिजनों पर सैंकड़ों मुकदमे दर्ज क्यों होते…?
पत्रकारों से रंजिश समझी जा सकती है लेकिन पुलिस तो बेचारी डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स का हमेशा से सहयोग ही करती आई है फिर भी पुलिस से इस कदर नफरत का कारण समझ नहीं आता।
_JAH में अटेंडर तो छोड़िए पुलिस भी पिट कर चुप रहती है_
डीन राजनीतिक पारिवारिक सामाजिक और आर्थिक रूप से अब तक के सबसे ताकतवर अफसरों में पहले नंबर पर आते हैं कहीं यही वजह तो नहीं कि अपनी धाक जमाने के चक्कर में नफरती फरमान जारी कर दिया हो,
हालांकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के चंद पत्रकार यहाँ कम ही नजर आते हैं लेकिन जिन प्रिंट मीडिया वालों की बीट ही GRMC और JAH है वे कहाँ जाएँगे, खैर हो सकता है कि ऊपर से आदेश हो कि भैया अंदर की कारगुज़ारियों की खबरें बाहर जा रही हैं और इससे बड़ा नुक़सान होने की आशंका है तो एक ही जगह थी जहाँ पत्रकार और पुलिस बिना रोक टोक के अपना पैसा देकर चाय पानी कर सकते थे अब तो वहाँ भी बैन लगा दिया गया तो अब जो डीन खबर देंगे वही छापनी पड़ेगी क्योंकि ये नए जमाने का तुग़लक़ है कोई कुछ नहीं कर सकता क्योंकि इनके आगे प्रशासन और पुलिस की कोई औकात नहीं ये अपनी पर आ गए तो स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा जाएँगी और फिर सरकार को तो हमेशा की तरह घुटनों पर आना ही है इसलिए भैया अब से GRMC और JAH में सोच समझ कर जाना कहीं ये नहीं हो कि भैया इलाज करने वाले डॉक्टर जमकर आपका इलाज कर दें और हाँ ये फरमान खुद को सिंघम समझने वाली पुलिस के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना आम जनता के लिए।
क्या पुलिस और मीडिया से डर गए डीन….?
जैसे ही इस नफरती फरमान की खबर एक रात में आग की तरह फैली तत्काल प्रभाव से कैंटीन वाले गरीब भैया के सिर पर इस नफरती फरमान का ठीकरा फोड़ दिया गया जिससे डीन की नाक भी बच जाए और पत्रकार और पुलिस शांत हो जाएँ अब भैया पुलिस की तो मजबूरी है चुप ही रहेगी क्योंकि सबसे ताकतवर डीन से पंगा लेना कम से कम ग्वालियर पुलिस के बस की बात तो है नहीं लेकिन उन चंद पत्रकारों का क्या करेंगे जो न तो डीन या सुपरिटेंडेंट से उपकृत होते हैं और न ही बहुत ज्यादा यहाँ आते जाते हैं क्योंकि भैया डीन का रवैया इन चंद पत्रकारों के गले नहीं उतर रहा हालांकि डीन भी कम नहीं है दमदार इतने कि नौकरी कल जाती हो तो आज चली जाए साला 500 करोड़ का हॉस्पिटल तो है वहांँ एकछत्र राज करेंगे।
