
Small God’s Of Innocent Children
खास रिपोर्ट बच्चो के भगवान
भगवान भावना के भूखे होते हैं आडम्बर और पूजा पद्धति या चढ़ावे के नहीं,
उन्हें ताजे फूल भी नहीं चाहिए उन्हें शुद्ध जल की भी आवश्यकता नहीं है। वे केवल भक्त के मन मस्तिष्क में अपने प्रति श्रद्धा भाव को जानकर ही अपनी कृपा बरसाते हैं।
ऐसा ही एक नजारा आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं जहाँ छोटे मासूम बच्चों ने अपना मंदिर बनाया और उसमें माता की मूर्ति स्थापित कर भोग के लिए मिट्टी के लड्डू बनाकर बड़े ही श्रद्धा भाव से माँ की पूजा करने बैठ गए।
इन मासूमों की पूजा इतनी पवित्र और थी कि काफी देर तक वीडियो बनाने पर इन मासूमों का ध्यान हम पर गया तो बच्चे काफी खुश हो गए। हम नहीं जानते ये मासूम किस धर्म के या किस मजहब के हैं इस इलाके में हर धर्म मजहब के लोग निवास करते हैं और निश्छल मन और निस्वार्थ भाव से बच्चों को पूजा करते देख उन्हें नाम पूछने की हिम्मत नहीं हुई। हालांकि ये मासूम भी नहीं जानते होंगे कि भगवान कौन हैं कहाँ रहते हैं क्या करते हैं।
सबसे खास बात ये कि जिस मैदान में ये मासूम अपने भगवान का निर्माण कर रहे थे वो एक मंदिर का प्रांगण है हमारा मानना है कि बच्चों को बड़े मंदिर में जाने से बेहतर अपना खुद का मंदिर बना कर उसमें पूजा करना ज्यादा रुचिकर लगा शायद यही वजह है कि खेल खेल में इन मासूमों ने बहुत शानदार मंदिर का प्रतिरूप तैयार किया और आप देखेंगे कि इस मंदिर में हवन कुंड भी है साथ ही बच्चों द्वारा बनाई गई माता के दो प्रतिरूप भी, फूल पत्ती भी नजर आ रहे हैं और फिर मिट्टी के लड्डू तो हैं ही जिनका भोग बड़ी ही श्रद्धा से देवी माता को लगाया जाएगा। देखिए इन मासूमों को जो कितनी श्रद्धा और भक्ति से हाथ जोड़कर माँ की आराधना में लीन हैं। क्या बड़े से बड़े मंदिर का पुजारी या उसमें आने वाले बड़े बड़े दानी महात्मा इन मासूम बच्चों की भक्ति की बराबरी कर सकते हैं…?
इसलिए कहते हैं कि भगवान भावना के भूखे होते हैं।
