
भू माफियाओं के हाथों बेच दीं शहरवासियों की सांसें,
शहर के ऑक्सीजन जोन को खत्म कर रहे रिश्वत खोर अधिकारी…

ग्वालियर शहर के रखवाले ही अब इस शहर को खत्म करने पर तुले हैं और ये हम नहीं कह रहे ये तस्वीरें बयान करती हैं जो ग्वालियर के पॉश इलाके एजी ऑफिस के नजदीक की हैं, यहांँ आप देखेंगे कि सड़क किनारे पर स्थित ग्रीन बेल्ट के पेड़ों की किस तरह से बेदर्दी से काट डाला गया है, इन बड़े बड़े दरख्तों का हत्यारा कोई नागरिक नहीं है, कोई भू माफिया नहीं है और न ही कोई उद्योगपति है इन पेड़ों की हत्या करने वाला है ग्वालियर का नगर निगम प्रशासन जिसने एक बिल्डर के चांदी के जूते खाकर उसे लाभ पहुंचाने के लिए इन पेड़ों की हत्या कर दी, भावी पीढ़ी को खत्म करने साजिश में दरअसल पूरी सरकारें शामिल हैं क्योंकि विकास के नाम पर कंक्रीट के जंगल खड़े करके आबादी घटाने तरीका किसी ऐसे ही
मानवता के हत्यारों के दिमाग की उपज का नतीजा हो सकता है। हालांकि इसके पहले भी शहरीकरण के चलते साँसों को छीना जा चुका है।
क्या है पूरा मामला….
ग्वालियर के हरीशंकर पुरम इलाके में रोड पर निर्माणाधीन एक बिल्डिंग को दीदार करने में पेड़ आड़े आ रहे थे जिसके बाद बिल्डर द्वारा नगर निगम के चंद भ्रष्ट और निकृष्ट अधिकारियों के सामने नोटों की गड्डी ऐसे फेंकी गई जैसे कुत्ते के सामने हड्डी फेंकी जाती है,और निगम के अधिकारी कथित बिल्डर के आगे कुत्तों की तरह दुम हिलाते हुए पहुँच गए और बिल्डर ने जैसे ही टॉमी छू कहा निगम के अधिकारियों ने आदेश का पालन करते हुए ग्रीन बेल्ट में बरसों पुराने पेड़ों को काट डाला, अब पेड़ क्यों काटे गए किसके कहने पर काटे गए किसने काटे ये जांच का विषय है ये निगमायुक्त अमन वैष्णव का कहना है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि नवागत निगमायुक्त को बेवकूफ समझकर बरसों से एक ही सीट पर बैठे हुए नगर निगम के ये टॉमी कहीं आयुक्त को ही न काट लें क्योंकि ये मालिक के नहीं पैसों के वफादार है।
नोट-: हम पत्रकारिता से संबध रखते हैं और हमें इस तरह की भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए ये हम जानते हैं लेकिन क्या करें जब भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ शासन प्रशासन आम जनता और भावी पीढ़ी की साँसें छीनने पर आमादा हो तो गुस्सा आता है और जब हम लिखने के अलावा कुछ कर नहीं सकते तो इस तरह के शब्द निकल आते हैं…!
बुद्धिजीवियों से सादर क्षमा सहित 🙏
