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शहीदों की रोशनी छीनने वाले गुनहगार कौन….???

भूल गए शहीदों की कुर्बानी…..!

हम भूल‌‌ गए कुर्बानी….???

स्मार्ट ग्वालियर की जगमग रोशनी में शहीदों को अंधेरे की सौगात
जी हाँ देश‌ शहीदों की कुर्बानी भूल‌ गया है और ये हम नहीं कह रहे ये तस्वीरें बयान कर रही हैं ग्वालियर में जहाँ एक ओर दीपावली के मौके पर पूरा शहर रोशनी में नहाया हुआ था वहीं दूसरी तरफ शहीदों के समाधि पर घुप्प अंधेरे का साम्राज्य कायम है। और तो और सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री और प्रदेशाध्यक्ष के पहुंचने के बाद भी वीरांगना का अंधेरा खत्म नहीं हुआ। देखिए ये खास रिपोर्ट।
अपने प्राण न्यौछावर करके देश आजाद कराने वाले शहीदों के साथ देश‌‌ प्रदेश‌ के शासन प्रशासन कितनी चिंता और सम्मान है। ये आपको आज हम बताएँगे लेकिन उससे पहले हम आपको शहर में हो रहे अंधाधुंध विकास की तस्वीरें दिखाने जा रहे हैं। शहीदों की शहादत को अंधेरे में रखने वाले प्रशासन ने जहाँ एक ओर आम जनता की मेहनत की गाढ़ी कमाई के पैसे से राजपथ तैयार किया है। जो कभी जनता के काम नहीं आने वाला, यह स्मार्ट सिटी ग्वालियर की एकमात्र सड़क है जिसके कम्प्लीट होने से पहले ही चप्पे चप्पे पर भरपूर रोशनी का इंतजाम है। और यहाँ इस बात का खास ख्याल भी रखा गया है कि ये रोशनी एक मिनट भी बंद न हो क्योंकि यहाँ ग्वालियर चम्बल अंचल का सबसे पॉश क्लब है, यहाँ राजे महाराजाओं के गार्डन हैं और सबसे महत्वपूर्ण यहाँ महाराजा का महल भी है।
वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई को अंधेरे में नमन,
नेताओं के लिए फ्लैश लाइट,वीरांगना की अंधियारी दीपावली

अब आपको दिखाते हैं एक ऐसी तस्वीर जो आपको शर्मसार कर देगी। स्मार्ट सिटी ग्वालियर की एक अंधेरी सड़क पर घने अंधेरे में बनी एक ऐसी वीरांगना की समाधि जिसने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी आहुति दी थी लेकिन इस आहुति बलिदान और समर्पण की देश की सत्ताओं को जरूरत है और न ही आम जनता को। क्योंकि यदि आम जनता के मन में हुतात्माओं के प्रति सम्मान होता तो शायद ये वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का समाधि स्थल अंधेरे में नहीं रहता। किसी एक व्यक्ति ने भी अंधेरे में डूबे रानी लक्ष्मीबाई के समाधि स्थल पर रोशनी कराने की आवाज नहीं उठाई। ।अरे साहब आम जनता की छोड़िए सत्ता संगठन से जुड़े नेता जो रात को समाधि स्थल पर नमन करने पहुंचे वे भी इसके प्रति उदासीन नजर आए। घुप्प अंधेरे में वीरांगना को नमन करते भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व को रानी लक्ष्मीबाई का चेहरा भी नहीं दिखा होगा। क्योंकि यहाँ जो भी आता है वो नमन करने का दिखावा‌ जरूर करता है लेकिन कभी इसके उत्थान के बारे में नहीं सोचता। और न ही कभी सोचता है रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र दामोदर राव के बारे में जिसे कई वर्षों पूर्व रानी की पीठ से चुरा‌ लिया गया था।

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