ग्वालियर कलेक्ट्रेट में कितने सौरभ शर्मा….???

एंकर -: मध्यप्रदेश के परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद सभी शासकीय विभागों में सालों से व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन विभागों में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का अड्डा राजस्व विभाग बना हुआ है जिसकी बागडोर सीधे कलेक्टर के हाथ में होती है। ग्वालियर की बात करें तो यहाँ कई पटवारी आरआई समेत तमाम कर्मचारी अपने राजनीतिक आकाओं की कृपा पात्र बने हुए हैं कि कलेक्टर महोदया भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं हैं।
आपको बता दें कि ग्वालियर कलेक्ट्रेट में पदस्थ कर्मचारी कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान से कई गुना ताकतवर और रसूखदार हैं और यदि उनकी कमाई की बात की जाए तो दान देने में वे ग्वालियर कलेक्टर से पांच गुना ज्यादा दान दे देते हैं।
कलेक्टर से बड़ा कलेक्ट्रेट का पटवारी जो मंत्री के साथ बैठकर भोजन करता है
आज हम आपको एक ऐसे पटवारी के बारे में बताने जा रहे हैं जो कलेक्टर रूचिका सिंह चौहान से भी 5 गुना ज्यादा अमीर है पैसे वाला है और रसूखदार इतना कि कैबिनेट मंत्री के बगल में बैठकर खाना खाता है। शायद यही वजह है कि कलेक्टर भी सालों से एक ही जगह जमे पटवारी का कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं।
काली कमाई का असली स्त्रोत भूमाफियाओं के साथ पटवारियों की साइलेंट पार्टनरशिप,
पटवारी के कलेक्टर से अधिक अमीर होने का खुलासा उस समय हुआ जब ग्वालियर के सिविल अस्पताल में निर्माणाधीन आईसीयू के लिए दान दाताओं की सूची में शामिल पटवारी संदीप राजावत का नाम कलेक्टर से कहीं ऊपर नजर आया। हमने यहाँ ऊपर इसलिए लिखा है कि आईएएस और प्रथम श्रेणी अधिकारी कलेक्टर रूचिका सिंह चौहान ने जहाँ अपनी श्रद्धा अनुसार मात्र 11 हजार रुपए का दान रोगी कल्याण समिति में दिया वहीं दूसरी ओर कलेक्ट्रेट में थर्ड ग्रेड पटवारी संदीप राजावत ने रोगी कल्याण समिति में पूरे 51 हजार से ज्यादा रूपए दान किए।
मंत्री और मंत्री के भाई के साथ संदीप राजावत का कनेक्शन कलेक्टर पर भारी

यहाँ हम पटवारी और कलेक्टर की तुलना नहीं कर रहे हैं लेकिन जब हमने एक सामाजिक कार्यकर्ता और कलेक्ट्रेट में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ सालों से आवाज बुलंद कर रहे अबोध तोमर से चर्चा की तो उनका कहना था कि ग्वालियर कलेक्ट्रेट के पटवारी दस करोड़ रुपए तक कमाते हैं। ये बात सुनकर हमारे होश उड़ गए और भैया कलेक्टर के मुकाबले एक पटवारी हमें ज्यादा पॉवरफुल नजर आया। और हो भी क्यों न जब मंत्री के बगल में बैठकर खाना खा रहा है। मंत्री के भाई के साथ खड़े होकर समारोह में हिस्सा ले रहा है तो ये कलेक्टर कमिश्नर तो इस जैसे पटवारियों के आगे कुछ भी नहीं हैं। लेकिन यहाँ एक और सवाल उठता है कि क्या मंत्री के चहेते पटवारी का 15 साल से एक ही जगह जमा होना क्या कलेक्ट्रेट में एक और सौरभ शर्मा को जन्म दे रहा है। हालांकि ये केवल एक मामला नहीं है इसके साथ कई पटवारी आरआई और कर्मचारी ऐसे हैं जो कई सालों से एक ही जमे रहकर भ्रष्टाचार की मलाई खा रहे हैं और कलेक्टर तो छोड़िए कमिश्नर और सरकार भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती क्योंकि जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का।
