प्रतिभा को अवसर देने मध्यप्रदेश शासन का अनोखा नवाचार
अनुगूँज से मिला वंचित छात्रों को कला संस्कृति का राष्ट्रीय मंच।
देखिए बच्चों की कला संगीत नृत्य एवं नाट्य का मंच वीडियो के साथ।
एंकर -: मध्यप्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा पिछले चार वर्षों से किया जा रहा कला संस्कृति का रंगमंच अनुगूँज शासकीय स्कूलों के उन छात्रों के लिए एक बड़ी सौगात लेकर आया है जो कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते थे। लोक शिक्षण विभाग के संयुक्त संचालक दीपक पांडेय का के मुताबिक इस कार्यक्रम में 200 बच्चों ने भाग लिया जिनको ग्वालियर संभाग के सभी शासकीय स्कूलों के छात्रों का ऑडीशन लेकर चुना गया था। इन छात्रों की नैसर्गिक प्रतिभा ने अनुगूँज के मंच को नई दिशा प्रदान की है।
आप यकीन नहीं करेंगे कि मात्र 10-15 दिन की प्रेक्टिस के बाद इन बच्चों ने ग्वालियर संभाग स्तरीय अनुगूँज महोत्सव में अपनी कला का लोहा मनवा लिया है। तो सोचिए कि जब इन्हें प्रॉपर मार्गदर्शन मिलेगा तो ये बच्चे कला संस्कृति मनोरंजन के क्षेत्र में क्या कुछ नहीं कर सकते।
वीओ01-: देखिए इन नन्हें हाथों को जिनकी थाप तबले पर पड़ते ही मधुर संगीत निकल रहा है। यहांँ आप देखेंगे कि विभिन्न तरह के संगीत वाद्ययंत्रों के साथ रियाज करने वाले बच्चे इससे पूर्व इन वाद्य यंत्रों को नहीं जानते थे। ये भी हो सकता है कि इन्होंने इन वाद्यों का नाम भी शायद ही सुना हो लेकिन मात्र दो चार दिन की रिहर्सल ने इनके अंदर के कलाकार को नई दिशा देने के साथ इन्हें अपना भविष्य चुनने का मौका भी दे दिया है। यहाँ एक और बात गौर करने वाली है कि इन छात्रों को तैयार करने वाले गुरूओं का योगदान भी सराहनीय है। क्योंकि कच्ची मिट्टी को आकार देने वाले ये गुरूजन ही हैं जो इन छोटे स्कूली बच्चों को बेहद कम समय में तैयार कर पाते हैं। चाहे वो भरतनाट्यम नृत्य की महारथी पद्मजा शंकर हों या मणिपुरी नृत्य के गुरू महाराज होजाई गम्बा, या फिर नाट्यशास्त्र के जानकार हिमांशु द्विवेदी ये सभी नाम देशके नामचीन हस्तियों में शुमार हैं। और यही वजह है कि इन्हें हर मंच पर सम्मानित किया जा चुका है। अनुगूँज महोत्सव के चार वर्षों की सफलतम यात्रा के लिए इन्हींका योगदान सर्वोपरि रहा है।
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वीओ02-: देश में बेटियों की सामाजिक व्यथा और नारीशक्ति को लेकर रचे गए महानाट्य “बेटी बोझ नहीं भविष्य है” के मंचन को देखकर सभागार में मौजूद अतिथिगणों समेत हर किसीकी आंँखें नम हो गईं। जब ग्रामीण परिवेश में पली बढ़ी बेटी और उसकी जन्मदात्री को पुरुष प्रधान समाज में सदियों से चली आ रही मानसिकता का सामना करना पड़ा। वहीं जब बेटों के बदले बेटी ने खुद को साबित करके दिखाया तो अनुगूँज महोत्सव का नाम सार्थक हो गया क्योंकि यहाँ एक बेटी की सफलता की आकाशभेदी गूँज ने सबकी आँखें खोल दीं और सभागार में मौजूद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने बेटी को 11 हजार रुपए और नाट्य में काम कर रहे सभी कलाकारों को नगद राशि की घोषणा कर सम्मानित किया। नाटक में दर्शाया गया कि भारतीय ग्रामीण परिवेश में बेटों की चाह में गांव का शेखचिल्ली अपनों पर किस कदर जुल्म करता है। और जब वही बेटा पूरे कुल का नाम समाज में खराब कर देता है तो बचपन से जीने के लिए संघर्षरत एक बेटी पूरे समाज और देश में अपने खानदान का नाम रोशन करती है, इस महानाट्य के रचयिता और निर्देशक राजा मानसिंह संगीत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ हिमांशु द्विवेदी रहे। इस नाटक में रंग प्रकाश और ध्वनि के संयोजन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वीओ03-: मध्य प्रदेश शासन द्वारा कला और संस्कृति को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है किसी क्रम में नृत्य की विधा शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम का भी प्रदर्शन इस अनुगूँज महोत्सव में किया गया। कला मर्मज्ञ पद्मजा शंकर द्वारा रचित और निर्देशित इस नृत्य में भक्तिरस और नृत्य के साथ संगीत का संयोजन लोगों के मन को लुभा गया। यहाँ शासकीय स्कूलों के बच्चों ने जिस तरह की प्रस्तुति दी उसे देखकर लगा कि ये कोई प्रोफेशनल आर्टिस्ट मंच पर अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं। सचमुच ये कहना गलत नहीं होगा कि यदि इन छात्रों को मौका मिलेगा तो ये अपने शहर और प्रदेश के साथ देश का नाम भी रोशन करेंगे।
वीओ04-: कत्थक नृत्य की भाव भंगिमाओं में पारंगत छात्राओं को देखकर कोई ये बिल्कुल नहीं सोच सकता कि इन्हें इस विधा को सीखें हुए 10-12 दिन ही हुए हैं। कत्थक नृत्यांगना संयोगिता श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित इस नृत्य के माध्यम से सीएम राइज स्कूल की छात्राओं द्वारा तीव्र गति लय ताल के समायोजन के साथ शिव आराधना को प्रस्तुत किया गया जिससे कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार का पूरा माहौल भक्तिरस से सराबोर हो गया।
वहीं एक और खास प्रस्तुति यहाँ देखने को मिली हाथों में तीर कमान भाले ढाल तलवार लेकर मणिपुरी नृत्य करते छात्रों ने पूरे मणिपुर की संस्कृति को जीवंत कर दिया। सभागार में मौजूद दर्शक इस नृत्य को देखकर रोमांचित हो उठे। मणिपुरी कलाकार महाराज होजाई गम्बा द्वारा निर्देशित इस मणिपुरी नृत्य को छात्रों ने पूरी शिद्दत के साथ मंच पर प्रस्तुत किया। वहीं अनुगूँज महोत्सव के शो स्टॉपर के रूप में अंतिम नृत्य वेस्टर्न और भारतीय पारंपरिक नृत्य संगीत का कार्यक्रम फ्यूजन प्रस्तुत किया गया। जिसने हॉल में मौजूद सभी दर्शकों की तालियां बटोरीं।
वीओ-: अनूगूँज महोत्सव में विभिन्न प्रस्तुतियों के पश्चात मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा द्वारा कलाकार बच्चों और निर्देशन करने वाले गुरुजनों को अवार्ड और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। संयुक्त संचालक दीपक पाण्डेय द्वारा भी छात्रों और कलागुरुओं का सम्मान किया गया।
