देशभक्ति पर भारी पड़ी आदत_ब्लैक आउट में भी रोशन रहा शहर

दिखावे की देशभक्ति_नियम कानून तोड़ने की आदत कहीं भारी न पड़ जाए।

हम नहीं सुधरेंगे_जोश के साथ होश भी जरूरी

ग्वालियर-पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के तहत हुई एयर स्ट्राइक के बाद सरकार ने देशभर में मॉक ड्रिल की रिहर्सल का आयोजन किया। यह मॉक ड्रिल रिहर्सल इसलिए की गई ताकि हम देख सकें कि देश युद्ध के लिए कितना तैयार है आपातकालीन स्थिति में किस तरह से सरवाइव कर पाएगा। और सबसे बड़ा सवाल कि हम देश के प्रति कितने जवाबदेह हैं।
हममें से कितने लोग बड़े देशभक्त और नियम कानून का पालन करने वाले हैं यह आज की मॉक ड्रिल से साबित हो गया। आज हम आपको बताएंगे की ग्वालियर में मॉक ड्रिल के बाद हुए ब्लैक आउट का लोगों ने कितना पालन किया और जानबूझकर किन लोगों ने गृह मंत्रालय की अपील भी किन लोगों पर बेअसर रही।

ग्वालियर में ब्लैक आउट का नजारा देखने के लिए ग्वालियर आईजी अरविंद सक्सेना ग्वालियर के संभाग आयुक्त मनोज खत्री और डीआईजी अमित सांघी ग्वालियर किले पर पहुंचे आपको बता दें कि जमीन से तीन सौ फीट की ऊँचाई पर स्थित ग्वालियर का ऐतिहासिक किला एकमात्र ऐसी जगह है जिससे पूरे ग्वालियर शहर के को पूरी तरह से देखा जा सकता है। ब्लैक आउट से पहले की तस्वीर देखिए जब सायरन नहीं बजा था और लोग अपने रोजमर्रा के कामों में लगे हुए थे लाइट जल रही थीं वाहनों का आवागमन बदस्तूर जारी था। उम्मीद देखी जा रही थी कि जैसे ही सायरन बजेगा तत्काल राहे थम जाएगी आम शहरी प्रधानमंत्री जी की अपील का अक्षर से पालन करेंगे और पूरे शहर को ब्लैक आउट यानी अपने घर दुकान संस्थान कार्यालय की रोशनी बंद कर देश को सुरक्षित रखने की इस मुहिम में अपना योगदान देंगे लेकिन जब सायरन भी बजा उसके बाद कुछ इलाकों में लाइट्स ऑफ हुई जो कि लोगों ने अपने मन से गाइडलाइंस का पालन करते हुए की और उनका हम धन्यवाद देते हैं। लेकिन आपातकालीन स्थिति के लिए की गई इस मॉक ड्रिल और ब्लैक आउट का मजाक उड़ाते हुए शहर में चंद लोग ऐसे भी थे जो ना तो देश के प्रधानमंत्री की अपील मानते हैं और ना ही शासन प्रशासन के नियम कानून का पालन ही करते हैं। इन्हें फर्क नहीं पड़ता कि सीमा पर सैनिक इनकी ही सुरक्षा में शहीद हो रहे हैं। देश के सभी सुरक्षा बल शासन प्रशासन पुलिस देश को आपातकालीन स्थिति में तैयार करने के लिए अपने तमाम सारे संसाधन झोंक रहे हैं उन्हें चिंता है अपने देशवासियों की यह किसी भी तरह से कोई कैजुअल्टी ना हो लेकिन हमारी भी हमारे ही देश के कुछ पढ़े लिखे समझदार बुद्धिजीवी लेकिन नियम कानून का मजाक उड़ाने वाले शहरी इस ब्लैक आउट को सरकार का नया शिगूफा मानकर इसका पालन ही नहीं करते यह बेहद दुखद है क्योंकि ऐसे लोगों को ना अपनों की चिंता है और ना ही देश की क्योंकि आपातकालीन स्थिति में जरा सी गलती सैकड़ों पर भारी पड़ सकती है।

 

 

 

 

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