घटिया निर्माण पर रटा रटाया जवाब जाँच होगी जाँच होगी
मीडिया कर्मियों को बोले आप भ्रम में हैं
ग्वालियर की खराब सड़कों के चलते देशभर में हुई किरकिरी के बाद जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट को आखिरकार ग्वालियर की याद आ ही गई। गौरतलब है कि प्रभारी मंत्री केवल किसी बड़े कार्यक्रम या मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के आगमन पर ही ग्वालियर की ओर रूख करते हैं और इस बार भी यही हुआ है आपको बता दें कि 5 जुलाई को ग्वालियर में सूबे के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव का आगमन है और इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद रहने वाले हैं यही वजह है कि प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट को ग्वालियर आना पड़ा। यही नहीं पत्रकारों द्वारा निर्माण एजेंसियों का भ्रष्टाचार और कार्रवाई के सवाल पर भी मंत्री की चुप्पी साफ संकेत देती है कि पूरे कुएं में भांग घुली है। हालांकि इसी बहाने देश भर में बदनाम हुई ग्वालियर की सड़कों का निरीक्षण और प्रदेश सरकार की महाभ्रष्ट निर्माण एजेंसियों से जवाब तलब करने का मौका भी मंत्री को मिल जाएगा। बड़ा सवाल यह उठता है कि तुलसी सिलावट ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री हैं या मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रभारी मंत्री या फिर अपने मेंटर और राजनीतिक ज्योतिरादित्य सिंधिया के दरबान ये जनता को तय करना है। हालांकि मंत्री ने पत्रकारों के जवाब भी वही रटे रटाए वाले ही दिए हैं लेकिन अपने साथी कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर से सीख कर ये भी सड़कों पर भरपूर नौटंकी करते नजर आए। बाइक पर महिलाओं की तरह बैठकर मंत्री जी ने ग्वालियर की जनता को क्या जताना चाहा ये तो वही जानें लेकिन इतना जरूर है कि सड़कों की मरम्मत के बहाने आपदा में अवसर की तलाश में ग्वालियर आने वाले मंत्री जी की झोली खाली नहीं रहेगी। क्योंकि अधिकारियों में दहशत है कि ग्वालियर की विश्वप्रसिद्ध गड्ढा सड़कों की भेंट कौन चढ़ेगा या फिर भेंट कौन चढ़ाएगा।
