सीएम मोहन यादव द्वारा अवैध बस टर्मिनल का लोकार्पण_पागल हुए विकास की महागाथा

अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चलाने वाले सीएम का अवैध लोकार्पण 

नियमों को दरकिनार कर विकास कार्यों से किसका होगा भला

जनता के लिए यातना साबित होगा ग्वालियर विधानसभा में बना ISBT

 

अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चलाने वाले मध्यप्रदेश के सीएम डॉ मोहन यादव आज एक अवैध बस स्टैंड का लोकार्पण करेंगे। जी हाँ ग्वालियर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले इस इंटर स्टेट बस टर्मिनल की इमारत पूरी तरह से अवैध है। और यह हम नहीं कह रहे यह साबित हुआ है टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के जॉइंट डायरेक्टर के के कुशवाहा के बयान से जिनके मुताबिक 77 करोड़ की इस विशालकाय और भव्य इमारत की अनुमति अब तक नहीं हुई है। सरकार के खिलाफ अक्सर एक मुहावरा सोशल मीडिया पर वायरल होता है कि विकास पागल हो गया है तो यही हुआ है मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की विधानसभा में। जहाँ एक ओर मासूम बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल की अवैध इमारतों का निर्माण हुआ वहीं दूसरी तरफ आम जनता की सुविधा को देखे बगैर रेलवे स्टेशन से 4 किलोमीटर दूर बस स्टैंड का निर्माण कर दिया। जबकि नियम के मुताबिक कोई भी बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन 500 मीटर की दूरी पर होना चाहिए। हमारा सवाल यह है कि भाजपा के ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अवैध कॉलोनियों को वैध करने के फैसले को पलटते हुए वर्तमान सूबे के मुखिया डॉ मोहन यादव ने अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करने के आदेश दे दिए लेकिन अब ये खुद ही एक अवैध बस स्टैंड का लोकार्पण करने जा रहे हैं। मतलब साफ है कि जनता के लिए अलग कानून और सरकार के लिए अलग कानून वैसे भी कहावत है कि सैंया भए कोतवाल तो डर काहेका।

पागल हुए विकास का नमूना_जनता को होगा (हो गया) बड़ा नुकसान 

यदि हम मान भी लें कि यह बस टर्मिनल अवैध नहीं है और सरकार ने इसके निर्माण में नियमों को ताक पर नहीं रखा लेकिन क्या इस बस स्टैंड के बनने से सचमुच आम जनता भला होगा। क्या यहाँ से अंतर्रज्यीय  और सिटी बसों का संचालन हो पाएगा। ये सवाल अभी तक अनुत्तरित हैं क्योंकि बिना सर्वे किए बिना जनता की राय लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने अपने ऑफिस के एसी कमरों में पूरी योजना बना ली और जिस तरह से सरकारी नुमाइदों और नेताओं ने जनता की मेहनत की गाढ़ी कमाई से वसूले गए टैक्स के पैसे को ठिकाने लगाने का जो नवाचार यहाँ किया है ऐसे उदाहरण पूरे देश भर में नजर आते हैं। ये जानते हैं कि जनता मूर्ख है कुछ बोलेगी नहीं और हम जनता के पैसे पर ऐश करते रहेंगे। इस अवैध बस टर्मिनल के नियमानुसार नहीं बनने से बस ऑपरेटर भी आक्रोशित हैं उनका कहना है कि यहाँ आज ही इतनी अव्यवस्थाएँ नजर आई हैं जबकि आज लोकार्पण होना है इसके बाद तो ये बदहाल होने वाला है। वहीं दूसरी ओर इसे रेलवे स्टेशन से तीन किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर बनाने से किसी भी यात्रा को किसी तरह की सुविधा नहीं मिलने वाली और सुरक्षा की बात तो छोड़ ही दें महिला सुरक्षा के दावे करने वाली सरकार यहाँ फेल हो जाएगी क्योंकि जब कोई महिल यहाँ शहर से इतनी दूर बस पकड़ने आएगी तो किसी भी वारदात से इन्कार नही किया जा सकता। बहरहाल जो भी हो सीएम इसका लोकार्पण तो कर रहे है लेकिन वैध अवैध से परे जाकर यदि आम जनता को जरा भी लाभ मिलता है तभी इस बस स्टैंड का होना सार्थक होगा अन्यथा ग्वालियर की अन्य विकास योजनाओं की भांति ये भी सफेद हाथी साबित होने वाला है।

 

 

 

 

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