बड़ेरा भारस के 35 करोड़ के विकास कार्यों का लेखा जोखा नहीं ले पाया प्रशासन
8.5 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश होने के बावजूद कार्रवाई शून्य
देश और प्रदेश की सरकारें ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को बेहतर जीवन देने के लिए प्रयासरत हैं वही ग्रामीण अंचल में संपूर्ण सुख सुविधा प्रदान करने के लिए पैसा भी पानी की तरह बहा रही है लेकिन क्या वह पैसा सचमुच ग्रामीण जनता और किसानों की भलाई में लगाया जा रहा है ये एक बड़ा सवाल है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों में बड़े-बड़े घोटाले लगातार सामने आ रहे हैं। और मॉनिटरिंग के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाती है या कहें की मलाई में अधिकारियों का भी हिस्सा होता है और यही वजह है की ग्वालियर की बडेरा भारत ग्राम पंचायत में एक नहीं दर्जनों घोटाले सामने आए हैं। जिनमें से सबसे प्रमुख है वृक्षारोपण घोटाला जिसमें 8:30 करोड रुपए की राशि से वृक्ष लगाए जाने थे जो कि आज 3 साल 3 4 साल बाद भी जमीन पर दिखाई नहीं देते। मियां बाकी पद्धति से लगाए गए वृक्षों की राशि 1 साल में निकाली गई जबकि यह राशि साल दर साल वृक्षों के बढ़ाने के साथ निकाली जानी थी। दूसरा घोटाला है पशुओं के लिए शेड घोटाला इसमें भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया। इसके अलावा बडेरा भारत पंचायत में 35 करोड़ विकास कार्यों का ढिंढोरा पीटा गया लेकिन यहां दलित बस्ती में पीने को पानी तक नहीं नल की लाइन है लेकिन उ पर दबंगों का कब्जा है और वे जाटवों के लिए बनाए गए शासकीय बोर से अपने खेत में पानी की सप्लाई कर रहे हैं। स्कूल भवन के हाल बदहाल हैं बच्चे धर्मशाला में पढ़ने को मजबूर हैं। कह सकते हैं कि जिस तरह से सरकार गांव की बेहतरीन के लिए काम कर रही है उसका यदि 10% भी इन गांवों तक पहुंचता तो इन गांव की स्थिति कुछ और होती हालांकि सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार धीरे-धीरे गांव को निगल लेगा
एंकर -: ग्वालियर की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत में सबसे बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है। बड़ी इसलिए कि यहाँ के तत्कालीन सरपंच और सचिव द्वारा अधिकारियों से मिलीभगत करके 35 करोड़ के विकास कार्य करवा लिए गए। और यही नहीं इन विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपए की बड़े पैमाने पर बंदरबांट की गई। हालांकि मामला खुलने के बाद सरपंच और सचिव को बर्खास्त कर दिया गया है। लेकिन आरोपी सरपंच और सचिव से करोड़ों रुपए की वसूली अब तक नहीं हो पाई है।
वीओ-: जी हाँ ये है बड़ेरा भारस ग्राम पंचायत जो सरकारी दावों के मुताबिक सबसे खुशहाल और विकसित ग्राम पंचायत है। लेकिन क्या ये सचमुच इतनी विकसित और खुशहाल है इसका जायजा लेने पहुँचे हमारे संवाददाता ने जब स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा की तो पैरों तले ज़मीन निकल गई क्योंकि यहाँ शासन द्वारा करोड़ों रूपए पानी की तरह बहाए गए। ये हुआ ग्रामीण जनता की भलाई और उनके जीवन को बेहतर बनाने के नाम पर। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नए आयाम स्थापित करने के नाम पर। लेकिन कितना विकास हुआ ये तस्वीरों में नजर आ रहा है। बदहाल स्कूल भवन, पीने के पानी के लिए तरसती महिलाएं और ग्वालियर का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार तो केवल वृक्षारोपण के लिए 8 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला अंजाम दिया गया। जब हमने यहाँ के ग्रामीणों से बात की तो उनका कहना था कि यहाँ के पूर्व सरपंच सरबदी देवी और उनके पति पंजाब सिंह यादव द्वारा भ्रष्टाचार की सभी हदें पार कर दी गई हैं। वहीं अधिकारियों को की बार शिकायतें करने पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के नेक्सस के तहत भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण ग्रामीण क्षेत्रों में नजर आता है क्योंकि यहाँ न तो मीडिया की पहुँच है और न ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मॉनिटरिंग यही वजह है कि सरपंच सचिव स्तर पर भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो जाता है। यह अकेला ऐसा मामला नहीं है जो ग्रामीण क्षेत्रों में हुए फर्जी विकास कार्यों की पोल खोलता है ऐसे न जाने कितनी ग्राम पंचायतों में हजारों घोटालों को अंजाम दिया जा रहा है। हालांकि कलेक्ट्रेट और जिला पंचायत के दफ्तरों में बमुश्किल पहुँचने वाली ग्राम पंचायतों की हजारों शिकायतें रद्दी की टोकरी में फेंक दी जाती हैं।
बाइट-: रविन्द्र सिंह गुर्जर जनपद सदस्य बड़ेरा भारस
बाइट-: विवेक सिंह (जिला पंचायत सीईओ, ग्वालियर)
