परिवार ने ही ले ली बेटे की जान_वंश चलाने को थी बेटे की दरकार_पिता ने भी तिल तिल कर मरने छोड़ दिया_मजबूर असहाय माँ लगाती रही इलाज की गुहार_स्वास्थ्य विभाग होता जिम्मेदार तो बच जाती लाडो
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कुपोषण से एक साल की लाड़ो की मौत….
बहू बोली, सास कहती थी कि लड़की है, इसे मर जाने दे, यह जीकर क्या करेगी
सीएमएचओ ने कहा, बच्ची को लेकर घर भाग गए थे स्वजन
आज बेटियां भले ही जमीन से लेकर आसमान तक बुलंदी के झंडे गाढ़ कर अपने देश का नाम रोशन कर रही हैं, लेकिन अभी समाज में कई वर्ग अथवा परिवार ऐसे हैं जो बेटी को आज भी अभिशाप मानती है। ऐसा ही एक उदाहरण शिवपुरी जिले के ग्राम खांदी में सामने आया है। यहां एक मासूम बच्ची दिव्यांशी पुत्री लाखन धाकड़ उम्र 1 साल तीन माह का उसके स्वजनों ने महज इसलिए इलाज नहीं कराया, क्योंकि वह लड़की थी। परिणाम स्वरूप वह बीमार होकर कुपोषण का शिकार हो गई। दिव्यांशी ने शनिवार की दोपहर जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस पूरे मामले में सीएमएचओ का कहना है कि बच्ची को 1 अगस्त को दस्तक अभियान के तहत चिंहित किया गया। स्वजनों को इस बात के लिए समझाया गया कि वह बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवा दें, लेकिन उसके परिवार वाले उसे अस्पताल में भर्ती करवाने तैयार नहीं हुए। इसके बाद सरपंच से संपर्क कर मोहल्ले, पड़ौस के लोगों की पंचायत बुलवा कर दिव्यांशी के स्वजनों को समझाइश दी गई। इसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल भर्ती करवाया गया, लेकिन इसके बावजूद उसके परिवार वाले उसे अस्पताल से लेकर घर भाग गए। आज बच्ची को जिला अस्पताल लेकर आए, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
पांच महीने से अपने मायके में बिहार थी मां
सीएमएचओ डा संजय ऋषिश्वर के अनुसार बच्ची की मां खुशबू उसे लेकर पांच माह पहले अपने मायके चली गई थी। वहां से लौट कर आई तो एक अगस्त को बच्ची को चिंहित किया गया। 4 अगस्त को उसे सतनवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया गया। 5 अगस्त को सतनवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र से बच्ची किो जिला अस्पताल रैफर किया गया। यहां पीआईसीयू वार्ड में उसका उपचार चला। 5 अगस्त को ही बच्चे को मेडिकल कालेज रैफर कर दिया गया। वहां 7 अगस्त तक तक बच्ची का उपचार चला और हालत स्थिर हो गई। मेडिकल कालेज से बच्ची को एनआरसी ले जाने की सलाह देकर डिस्चार्ज किया गया, लेकिन दिव्यांशी के स्वजन उसे एनआरसी ले जाने की बजाय वापस गांव ले गए। वहां बच्ची की तबीयत फिर से खराब हो गई।
-बच्ची की उम्र 1 साल 3 माह
-बच्ची का वजन 3.700 ग्राम
-बच्ची का हिमोग्लोबिन 7.4 ग्राम
मां ने लगाए परिजनों पर गंभीर आरोप
-मेरी सास को बेटी पसंद नहीं थी, जब मैंने बेटी को जन्म दिया तो उन्होंने मुझे और अधिक प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। बेटी बीमार होती तो उपचार करवाने से यह कहकर इंकार कर देती कि लड़की है, इसे मर जाने दे। मेरी सास को कोई समझाता था तो वह समझने को तैयार नहीं होती। पति और देवर से इलाज के लिए कहती तो वे मुझे मारते थे।
खुशबू धाकड़
बच्ची की मां
