IT के 46 करोड़ के नोटिस ने दहला दिया कुक के परिवार को_

खानसामे को आयकर विभाग का 46 करोड़ का नोटिस

भरो नहीं तो होगी कार्रवाई_दर ब दर भटकने को मजबूर 

एंकर -: इनकम टैक्स ईडी सीबीआई तमाम सारी सरकारी एजेंसियां फर्जी शैल कंपनियों को रोक पाने में नाकाम साबित हो रही हैं यही वजह है की इन फर्जी कंपनियों का शिकार रविंद्र सिंह जैसे गरीब लोग बन जाते हैं जो अपने परिवार को पालने के लिए प्राइवेट नौकरी करते हैं और उन्हें प्राइवेट कंपनियों के मैनेजर और मालिक इन कर्मचारियों का शोषण करते हुए एक ऐसे जंजाल में फंसा देते हैं जहां से निकलना नामुमकिन सा लगता है। जी हां ऐसा ही एक मामला ग्वालियर के टोल प्लाजा पर जहाँ काम करने वाले अपने कर्मचारी रविन्द्र को ही ठगी का शिकार बना लिया। में सामने आया जहाँ 8000 रुपए की नौकरी करने वाले एक खानसामे को आयकर विभाग ने 46 करोड़ जमा करने का नोटिस थमा दिया। 40 करोड़ के नोटिस से अरविंद का पूरा परिवार सदमे में आ गया और उसने पुलिस की साइबर सेल से लेकर क्राइम ब्रांच और स्थानीय थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक सबसे गुहार लगाई। लेकिन उसकी समस्या का निराकरण नहीं होना था तो नहीं हुआ और आयकर विभाग ने साफ तौर पर कह दिया कि 46 करोड रुपए जमा करो नहीं तो कार्रवाई करेंगे

अब 8000 रूपए प्रति माह कमाकर अपने परिवार का पेट पालने वाला रविंद्र 46 करोड रुपए कैसे जमा करेगा यह एक बड़ा सवाल है। जब किसी ने मदद नहीं की तो रविंद्र सिंह ने वकील प्रद्युम्न सिंह भदौरिया के माध्यम से न्यायालय में गुहार लगाई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि फर्जी कंपनियों के माध्यम से जिन देश में लाखों करोड़ों रुपए का अवैध लेनदेन और ब्लैक मनी को व्हाइट करने का जो खेल जारी है उसे पर किसी की नजर नहीं है ना तो आयकर विभाग की और ना ही पुलिस की क्योंकि यहां पुलिस के पास जाने के बावजूद भी पुलिस ने इस मामले से पल्ला झाड़ लिया। वहीं बिहार के रहने वाले शशिभूषण राय जिसने जिसने रविंद्र सिंह का दिल्ली में अकाउंट खुलवाया और सैकड़ों करोड रुपए का अवैध लेनदेन किया पुलिस और इनकम टैक्स उसके प्रति भी पूरी तरह से उदासीन है मामला सैकड़ों करोड रुपए की ब्लैक मनी का है जिसके चलते पंजाब नेशनल बैंक दिल्ली पुलिस और स्थानीय पुलिस के साथ इनकम टैक्स विभाग की मिली भगत से इनकार नहीं किया जा सकता। बहरहाल एक ढाबे पर कुक की नौकरी करने वाला रविंद्र दर-दर भटकने को मजबूर है क्योंकि₹8000 कमाने वाला 46 करोड रुपए कैसे चुकाएगा इसका सवाल किसी के पास नहीं है।

बाइट-: रविंद्र सिंह (पीड़ित)

बाइट-: प्रद्युम्न सिंह भदौरिया एडवोकेट (हाईकोर्ट)

Please follow and like us:
Pin Share
INSTAGRAM