ग्वालियर नगर निगम के जहरीले तालाब से 7 गाँव परेशान
4 महीने से रास्ता रोका_पक्की सड़क बन गई जहरीला तालाब
ग्वालियर के महापौर कमिश्नर विधायक सब उदासीन
एंकर -: आज हम आपको नगर निगम द्वारा बनाए गए एक ऐसे नर्क का नजारा दिखाने जा रहे हैं जिसे देखकर आप हैरान रह जाएंगे। इस नरक को बनाने में कहीं ना कहीं हम इंसानों का भी पूरा सहयोग है। लाखों टन कचरा मवेशियों की सड़ती लाश है और बीमारी पैदा करने वाली बेहद भयानक दुर्गंध से सामना करना हर किसी के बस की बात नहीं है। लेकिन यहां के बाशिंदे हर रोज इस नर्क का दीदार करते हैं इस नर्क में आवागमन करते हैं। और इस नर्क से अपने परिवार के लिए बीमारियां मुफ्त में ले जाते हैं। जी हां यह नजारा है ग्वालियर के लैंडफिल साइट का जहां शहर भर का कचरा गंदगी और मृत जानवरों की लाशें पहुंचती है। देखिए ग्वालियर के इंसानी नर्क की खास रिपोर्ट।
वीओ-: इन तस्वीरों में जो तालाब आप देख रहे हैं दरअसल यह तालाब नहीं है यह वह पक्की सड़क है जिस पर चलकर छोटे-छोटे बच्चे अपने स्कूल जाते थे। नगर निगम की लापरवाही और उदासीनता के चलते 6 गाँवों के बच्चे 4 महीने से स्कूल नहीं जा पाए हैं। क्योंकि लैंडफिल साइट के कचरे से निकलने वाले जहरीले पानी में इस सड़क को तालाब में तब्दील कर दिया है वहीं इसके आसपास के इलाके में पूरी तरह से जल जमाव हो चुका है। वार्ड 66 में आने वाले इस इलाके में जहरीले धुएं का भी उतना ही प्रकोप है जितना इस लैंडफिल साइड से जमा होने वाले लाखों टन कचरा से निकलने वाली जहरीली दुर्गंध का। लेकिन यहां न तो किसी बड़े अधिकारी का दफ्तर है और ना ही किसी राजनेता का कार्यालय और कोई नेता यहाँ आता भी नहीं है। और यही वजह है कि यहां के स्थानीय निवासियों की गुहार निरंकुश नौकरशाहों के कानों में नहीं पहुंचती तमाम आवेदन और निवेदन करने के बाद भी 6 गांवों को शहर से जोड़ने वाली इस सड़क पर बने जहरीले तालाब से 4 माह बाद भी ग्रामीण जनता का रास्ता पूरी तरह बंद है। यहां कोई बीमार होता है तो उसे 7 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर शहर में आना पड़ता है स्कूल के बच्चे स्कूल जा नहीं पा रहे हैं। काश यहां कभी मुख्यमंत्री आते तो यह रातों-रात तालाब सड़क में तब्दील हो जाता। ग्वालियर की महापौर शोभा सिकरवार इस ओर से पूरी तरह उदासीन नजर आती हैं और उदासीन नजर आते हैं वह निगम कमिश्नर संघप्रिय गौतम जिन्होंने पदभार संभालते समय ग्वालियर की जनता को बेहतर सुविधाएं देने के दावे किए थे। हालांकि ग्वालियर के सभापति मनोज तोमर ने इस समस्या का समाधान करने का भरोसा दिया है उनका कहना है किस विषय पर मुझे जानकारी है और मैं जल्द ही निगम आयोग से कहकर इस समस्या का निराकरण करवाऊंगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है की आम नागरिकों के वोट पर निर्वाचित हुई महापौर और ग्वालियर नगर निगम के कमिश्नर जो इसी आम जनता के टैक्स से अपने परिवार का पेट भरते हैं वे कब सुनेंगे कब उनकी नींद खुलेगी और कब वे आम जनता की समस्याओं को समझेंगे उसका निराकरण करेंगे लेकिन फिलहाल तो 4 महीने से बच्चे स्कूल नहीं गए हैं।
