सुधियों की आधी सदी का सच_संस्मरण आत्मकथा या फिर अनकही व्यथा..राज चड्ढा (लेखक व्यंग्यकार राजनेता समाजसेवी एवं पर्यावरणविद्
एंकर -: “साँची कहौं” की व्यंग्यात्मक शैली से चर्चित रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता राज चड्ढा की सुधियों की आधी सदी पर कितनी धार होगी ये सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि राज चड्ढा एक ऐसा व्यक्तित्व हैं जो सत्य के पथिक हैं और सच का साथ देने में वे अपने पराए का भी भेद नहीं करते हैं। ग्वालियर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और प्रदेश मंत्री जैसे पदों पर रहकर अपनी ही पार्टी की बदलती दशा और दिशा देखकर नसीहत देना नहीं भूलते।
अपनी उम्र के उत्तरार्द्ध में भी प्रकृति पर्यावरण को पोषित करने का जोश जुनून जो राज चड्ढा में नजारा आता है वो बहुत कम लोगों में मिलता है।
राज जी को एक युवा भाजपा कार्यकर्ता की अभद्रता के बाद “सुधियों की आधी सदी” लिखने की प्रेरणा मिली तो उन्होंने अपने जीवन के संस्मरण लिखे हैं आपको इस किताब में जनसंघ की नींव रहीं राजमाता विजयाराजे सिंधिया से लेकर कुशाभाऊ ठाकरे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दीनदयाल उपाध्याय का संघर्ष सादगी और सरलता तक सब कुछ मिलने वाला है। 25 अक्टूबर को विमोचित होने वाली पार्टी के शैशव काल की गाथा से लेकर ग्वालियर रियासत के कैलाशवासी महाराज माधवराव सिंधिया तक के संस्मरणों का चित्रण देखने को मिलेगा। राज चड्ढा ने अपने पार्षदी के दौरान अपने ही साथी पार्षदों की पोल खोली है। वहीं उन्होंने इस पुस्तक में बड़ी साफगोई से पूर्व और वर्तमान नेताओं के चरित्र पर भी चोट की है। राज चड्ढा ने आत्मकथा रूपी इस किताब में समाज राजनीति और सिस्टम पर कड़ा प्रहार करने वाली है। जिसे पढ़कर लोग तिलमिलाएँगे भड़केंगे कलपेंगे और साथ ही कुछ अपशब्द भी कहेंगे क्योंकि ये सच है और सत्य कड़वा होता है और सच किसी को हजम नहीं होता।
वीओ-: एक ऐसा व्यक्तित्व जो खांटी व्यापारी रहा, बेहतरीन कलमकार रहा, शुचिता और संस्कारों का पर्याय बनकर जिसने राजनीति रूपी काजल की कोठरी में रहकर बेदाग निकल आने का एक कीर्तिमान स्थापित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक नींंव की तरह पार्टी की बुलंद इमारत को मजबूती प्रदान की। और अब अपनी उम्र के उत्तरार्द्ध में आकर प्रकृति पर्यावरण और गोवंश के साथ जीव मात्र की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। एक ऐसे व्यक्ति की कहानी आज हम आपके सामने लेकर आए हैं जिन्होंने हर कीमत पर सत्य निष्ठा की मिसाल कायम की देखिए राज चड्ढा की आत्मकथा सुधियों की आधी सदी पर ungli.in की खास रिपोर्ट
