सिंधिया राजवंश के खून के रिश्ते कितनी हकीकत कितना फसाना,
क्या है खून के रिश्तों का अर्थ…?
देखिए ungali.in की Exclusive Story.
खून के रिश्तों की दुहाई क्यों दे रहे सिंधिया
क्या ढह रहा सिंधिया का जन आधार
हर समाज से अलग अलग रिश्ते नाते जोड़ने का क्या है माजरा
चंद सिपहसालारों के बनाए आभा मंडल में कैद सिंधिया की छटपटाहट का नतीजा है रक्त संबंध बनाना
रक्त संबंध या वोट संबंध क्या है इसकी असलियत
क्या सिंधिया को खिसकते जनाधार का डर सता रहा है
अपनों को भुलाकर गैरों से खून रिश्तों का दावा क्या कमजोरी की निशानी
वर्षों से सेवा कर रहे नौकरों से आशियाना छीना तो अपनों को भी नहीं छोड़ा
बड़ा सवाल-: कौन है सिंधिया का अपना या फिर स्वारथ लाग कर रहे सब प्रीती
कैलाशवासी श्रीमंत माधवराव सिंधिया के बाल सखा से भी नहीं बना पाए ज्योतिरादित्य
वो (सिंधिया) बड़ा आदमी है कुछ भी कह सकता है_ बालेन्दु शुक्ला वरिष्ठ कांग्रेस नेता
खून का नहीं वोट के रिश्ते हैं_सुरेंद्र सिंह यादव जिलाध्यक्ष कांग्रेस
कौनसे समाज के हैं डीएनए चेक होना चाहिए योगेश डंडौतिया दलित नेता कांग्रेस
सिंधिया का खून बहुरंगी हो गया है आचार्य सतेंद्र सिंह भदौरिया सुप्रसिद्ध ज्योतिषी
मराठा साम्राज्य का सबसे मजबूत स्तंभ रहे सिंधिया राजवंश की सियासी चालें हर कोई नहीं समझ सकता। और वो जनता तो कतई नहीं जिससे सिंधिया वंश के वर्तमान मुखिया वोट के लिए अपने खून के रिश्ते की दुहाई देते नहीं थकते। देश और प्रदेश के सियासी मैदान में अलग-अलग समाजों का बोलबाला रहता है। राजनीतिक दल और नेता दोनों ही अपने भाषणों में सभी समाजों से अपना गहरा रिश्ता बताते नजर आते हैं। ऐसे समाज जो आज एक दूसरे का मुँह देखना भी पसंद नहीं करते आपसी मतभेद के साथ इन समाजों का मनभेद भी किसी से छिपा नहीं है। तो सवाल यह उठता है कि क्या नेता केवल वोट लेने के लिए ही समाजों को बरगलाते हैं। अब बात करते हैं एक ऐसे नेता की जो मंच से हर समाज के साथ अपने खून का रिश्ता होने का दावा करते हैं। यह है केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जो आम जनता को अपनी प्रजा समझ कर बार-बार यह जताने की कोशिश करते हैं कि आपका और हमारा खून का रिश्ता है जो कि भरे मंचों से उनके बयानों में लगातार नजर भी आता है। लेकिन क्या सचमुच जनता भी सिंधिया से खून का रिश्ता मानती है समझती है। कुछ लोगों का कहना है कि सिंधिया का खून बहुरंगी है कुछ लोग कहते हैं कि यह खून का नहीं वोट का रिश्ता है और कई लोगों ने यह भी कहा कि सिंधिया का डीएनए चेक होना चाहिए कि उनका किस से खून का रिश्ता है। सियासी अखाड़े में जनता को लुभाने के सबके तरीके अलग अलग हैं लेकिन सिंधिया जिस तरह से मंच से जनता से अपना कनेक्शन जोड़ते हैं वो लाजवाब है लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि आम जनता की पहुंँच से काफी दूर केवल अपने चंद सिपहसालारों द्वारा बनाए गए आभामंडल में कैद खून के रिश्तों की दुहाई देते ज्योतिरादित्य सिंधिया क्या सचमुच जनता के प्रतिनिधि हैं या फिर वे आज भी एक महाराजा की तरह शोषक की भूमिका में हैं क्योंकि हमें एक पुरानी तस्वीर मिली जब उनके महल के बाहर बरसों से रहने वाले एक परिवार का आशियाना छीन लिया गया। खून के रिश्तों को लेकर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र यादव ने सिंधिया का मखौल उड़ाते हुए कहा है कि सिंधिया का जनता से रिश्ता केवल वोट का यह गया है। हालांकि अंत में सिंधिया के पूर्व सिपहसालार रहे और अब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष दर्शन सिंह जो दिवंगत हो चुके हैं उनके पुत्र प्रदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष मितेंद्र सिंह ने सिंधिया का जनता से अटूट रिश्ता बताया है और सिंधिया की तारीफ भी करते नजर आए।
