जनता से वोट की भीख मांगने वाले नेताओं की असलियत…
सालों तक सत्ता में रहने का घमंड सिर चढ़ कर बोला…
जनता के टुकड़ों पर पलने वालों ने जनता को ही बना दिया भिखारी…
जनता भी याद रखे जब वोट मांगने दरवाजे पर आएँ नेता…
आमसभा में जनता के मुंह पर ही कर दिया गणतंत्र का अपमान…
मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं प्रह्लाद पटेल…
भाजपा नेता ने जनता के मुँह पर ही कर दिया देवतुल्य वोटर का अपमान
आम जनता की मेहनत की गाड़ी कमाई से दिए जाने वाले टैक्स से चलने वाली सरकार जनता को भिखारी समझती है और यह हम नहीं कह रहे हैं यह सच है मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल की जिन्होंने न्याय के लिए गुहार लगाने वाली जनता को भिखारी करार दे दिया। राजगढ़ के सुठालिया में वीरांगना रानी अवंती बाई की प्रतिमा का अनावरण करने पहुंचे मध्य प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल कहते हैं कि लोगों में सरकार से भीख मांगने की आदत पड़ गई है और हमने भिखारी की फौज इकट्ठा कर ली है हम मुफ्त की चीजों का इतना आकर्षण रखते हैं कि हमें सभी चीज फ्री में चाहिए। जब नेता आते हैं तो कोई भी उन्हें एक हार पहनाकर उनको एक कागज पकड़ा देता है अपना मांग पत्र के देता है यह भीख मांगने की आदत अच्छी नहीं है। लेकिन क्या नेताजी यह बताने का कष्ट करेंगे कि जब चुनाव के समय आप दर-दर भीख मांगने पहुंचते थे क्या वह भीख नहीं थी या आपकी सरकार भीख मांगने से नहीं बनी क्या अपने चुनाव लड़ने के लिए उद्योगपतियों और आम जनता के आगे यह एक बड़ा सवाल है की सत्ता और सिंहासन के लिए भीख मांगने वाले नेता अब जनता को भिखारी किस बुनियाद पर कह रहे हैं यह वही जाने लेकिन आम जनता के पैसे पर पलने वाले यह नेता कहीं ना कहीं पूरे गणतंत्र का अपमान करते नजर आते हैं।
क्या है पूरा मामला जानिए यहाँ
एंकर: राजगढ़ जिले के सुठालिया में वीरांगना अवंती बाई की प्रतिमा का अनावरण करने आए प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि अब सरकार से भीख मांगने की आदत लोगों में पड़ गई है। नेता आते हैं तो उनको एक टोपला तो कागज मिलते हैं उनको मंच पर एक माला पहनाएंगे व एक मांँग पत्र पकड़ा देगे यह अच्छी आदतें नहीं है लेने की बजाय देने की मानस बनाइए में दावे से कहता हूं कि आप भी सुखी होगे व एक संस्कारवान समाज खड़ा करेंगे यह भिखारियों की फौज इकठ्ठा करना समाज को मजबूत करना नहीं है समाज को कमज़ोर करना है, हम मुफ्त की चीजों का इतना आकर्षण रखते हैं यह वीरांगनाओं का सम्मान नहीं है शहीद का सम्मान जब है तब हम उसके चरित्र के साथ जीने की कोशिश करे ऐसा कोई शहीद का नाम जानते हो जिसने किसी से भीख मांगी हो।
