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भिंड पत्रकार कांड के वायरल वीडियो में कौन था दगाबाज

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मोहन की पुलिस ने पीटा फिर अपनों ने किया दगा

भोपाल से दिल्ली तक लगाई गुहार किसी ने नहीं सुनी पुकार

जब कोई पुलिस अफसर या कर्मचारी किसी अपराध में फँसता है तो पूरा पुलिस फोर्स उसे बचाने में जुट जाता है। वहीं जब कोई प्रशासनिक अधिकारी कोई अपराध करते हुए रंगे हाथ पकड़े जाएँ तो पूरा डिपार्टमेंट उसका बचाव करता है नेताओं के साथ भी ऐसा ही है किसी भी नेता के कुकर्मों को छिपाने के लिए राजनीतिक दल किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं और ये होना भी चाहिए क्योंकि सबके अपने अपने स्वार्थ होते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे प्रोफेशन के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनों को ही बलि का बकरा बना देता है वो भी सत्ताधीशों की वाह-वाही या चंद चांदी के टुकड़ों के लिए।

 

जी हाँ ये पेशा है पत्रकारिता का जिसमें अपने ही अपनों का गला काट देते हैं।

ग्वालियर चम्बल अंचल में यूँ तो गद्दारी को सबसे बड़ा गुनाह माना जाता है। लेकिन आजकल ये गद्दारी लोगों की रोजी रोटी और निजस्वार्थ साधने का जरिया बन गया है। हम बताते हैं आपको कि कैसे एक पत्रकार अपनी जमात के लोगों के खिलाफ गुंडागर्दी का पर्याय बन चुकी पुलिस का साथ देता है और यही नहीं पुलिस द्वारा सताए गए और न्याय के लिए दर दर भटक रहे उन पीड़ित पत्रकारों को भरोसे में लेकर उनके साथ छल करके पुलिस के हवाले कर देता है। देखिए खास रिपोर्ट

 

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का वरदहस्त प्राप्त लाट साहब सुपर एसपी असित यादव के राज दबाए बैठे पत्रकार

सीएम डॉक्टर मोहन यादव के कृपापात्र सुपर एसपी की दबंगई

लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर लाटसाहब का चप्पलों का प्रहार

ताज़ा मामला मध्यप्रदेश के भिंड का है जहाँ चंद रोज पहले सूबे के मुखिया डॉ मोहन यादव के विशेष कृपा पात्र भिंड के लाट साहब पुलिस अधीक्षक असित यादव द्वारा कुछ पत्रकारों को अपने केबिन में बुलाकर बेरहमी से पिटाई की गई थी। इस घटना के बाद काफी बवाल भी मचा था लेकिन पुलिस की गुंडागर्दी और तानाशाही ने सभी पत्रकारों को अपमान सहकर पीछे हटने को मजबूर कर दिया। पिटे पिटाए पत्रकार भी बेचारे कहाँ जाते चुपचाप अपमान का खूनी घूंट पीकर रह गए आखिर रहना तो भिंड में ही है। हालांकि कुछ पत्रकारों ने एसपी के खिलाफ मोर्चा खोला उन्हें एसपी ने ब्लैकमेलर का तमगा दे दिया। और हम भी मानते हैं कि पीटे गए पत्रकार ब्लैकमेल के धंधे में शामिल थे लेकिन हमारा सवाल ये है कि एसपी असित यादव का ऐसा कौनसा राज इन कथित ब्लैकमेलर पत्रकारों के पास था कि एसपी को खुद अपने केबिन में बुलाकर इनकी सेवा करनी पड़ी। इस अनसुलझे प्रश्न का उत्तर अब तक नहीं मिल पाया है। चलिए वो भी ठीक है लेकिन बिना वारंट बिना शिकायत भिंड पुलिस ने ग्वालियर से लेकर दिल्ली तक पीड़ित पत्रकारों का पीछा किया ये बात भी हजम नहीं होती।

 

भिंड के सुपर एसपी असित यादव का दायरा भोपाल से दिल्ली तक

दिल्ली गुहार लगाने गए पत्रकारों के पीछे छोड़े अपने थानेदार

हिन्दी फिल्मों में अपने देखा होगा‌ कि पुलिस के किरदार वाला हीरो देश में कहीं भी जाकर अपनी कार्रवाई को अंजाम देता है और गुंडों को सबक सिखाता है ठीक यही काम भिंड के सुपर एसपी असित यादव की पुलिस का है क्योंकि ये मुख्यमंत्री की पुलिस है और ये दिल्ली तक जाती है

मुख्यमंत्री के वरदहस्त प्राप्त असित यादव की पुलिस का दायरा पूरे देश में जरूर है क्योंकि पुलिस विभाग किसी ऐरे गैरे के नहीं बल्कि सीधे मुख्यमंत्री के अंतर्गत आता है। इसलिए दिल्ली हो मुंबई हो या कलकत्ता भिंड पुलिस कहीं भी बिना अनुमति किसी पर भी नजर रख सकती है। लेकिन एक सवाल उठता है कि जब मुख्यमंत्री की पुलिस का‌ कार्यक्षेत्र दिल्ली तक शामिल है तो क्यों न इन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा का जिम्मा भी दे दिया जाए। वैसे भी जिसके पीछे देश के सबसे दबंग मुख्यमंत्री का हाथ हो उसकी सेवाओं का दायरा अनंत होता है। अब वारंटों के जरिए यात्रा करने‌ वाली पुलिस के पास इतना पैसा कहाँ से आया कि दिल्ली के खर्च की व्यवस्था किसने की ये बड़ा सवाल है जिसका जवाब किसी के पास नहीं है।

 

पीड़ित पत्रकारों को किसने फँसाया कैसे बना समझौते का वीडियो कौन है पत्रकारों के बीच काली भेड़…?

ग्वालियर चंबल में पुलिस की मुखबिरी आम बात है पुलिस अक्सर अपराधियों को पकड़ने उन पर निगाह रखने के लिए मुखबिर तंत्र का इस्तेमाल करती है। बिना मुखबिर तंत्र के पुलिस का काम आसान नहीं होगा लेकिन हम यहां आपको एक ऐसा खुलासा करने जा रहे हैं जो आपके दिलो दिमाग को हिला कर देगा। सुपर एसपी असित यादव के केबिन में पीटे गए पत्रकारों की मुखबिरी एक पत्रकार ने ही की थी। मध्य प्रदेश के एक निजी चैनल में कार्यरत इस पत्रकार का कार्य क्षेत्र ग्वालियर है लेकिन भिंड एसपी का कृपा पाठ होने के चलते या कहें असित यादव से नजदीकियां बढ़ाने के लालच में इस पत्रकार ने अपनी ही जमात के साथ छल धोखा या गद्दारी की। पीड़ित पत्रकारों के मुताबिक भिंड के नामचीन पत्रकार सौरभ शर्मा ने ग्वालियर के रेलवे स्टेशन से उन्हें किसी बड़े व्यक्ति से मिलवाने के नाम पर अपनी गाड़ी में बिठाया और भिंड रोड स्थित एक ढाबे पर ले जाकर भिंड पुलिस के हवाले कर दिया। इस पत्रकार ने ठीक वैसा ही काम किया जैसे पूर्व समय में डकैतों के मुखबिर अपनी पकड़ को चंद पैसों के लालच में डकैतों को दे देते थे। पीड़ित पत्रकार भिंड पुलिस को अपने सामने देखकर एक बार फिर दहशत में आ गए थे इसके बाद भिंड पुलिस इन दोनों पत्रकारों को भिंड के सुपर एसपी असित यादव के बंगले पर ले गई उन्हें डराया और धमकाया गया कि अपनी शिकायत वापस लो इसके बाद वे इस कदर डर गए कि पुलिस अधीक्षक के ऑफिस में मौजूद सोफे पर बैठकर एक ऐसा वीडियो बनवा लिया जिससे उनके ही पत्रकारिता के कैरियर पर पूर्ण विराम लग गया। सूत्रों के मुताबिक वीडियो बनाते वक्त पत्रकारों में एसपी असित यादव के मुखबिर सौरभ शर्मा की भी मौजूदगी रही। पीड़ित पत्रकारों ने बताया की सौरभ शर्मा ने उनसे कहा की एक वीडियो बनेगा जिसे पुलिस अपने पास रखेगी उसे वायरल नहीं करेगी लेकिन जैसे ही वीडियो बना तत्काल प्रभाव से उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। अब देखना यह है की पत्रकारिता जगत में सौरभ शर्मा जैसी ऐसी कितनी काली भेड़ें हैं जो पुलिस प्रशासन या राजनेताओं की मुखबिर बनकर पत्रकारिता को बदनाम और खत्म करने में जुटी हैं। ऐसे कितने पत्रकार हैं जो पुलिस और प्रशासन की कृपादृष्टि से अपनी पत्रकारिता को बेच रहे हैं। हमें ऐसे पत्रकारों को चिन्हित कर उनसे सावधान रहने की आवश्यकता है कि कब कौन कहाँ हमारी ही छोटी सी गलती की सुपारी लेकर पुलिस प्रशासन का मुखबिर बन जाए।

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