बौद्ध विहार में नफरती बोल_बुद्ध अंबेडकर के नाम पर भगवान के खिलाफ मोर्चा

ग्रामीण क्षेत्रों में दलितों का धर्मांतरण की साजिश_

हिन्दू देवी देवताओं के खिलाफ बौद्ध विहार में नफरती फरमान

एंकर -: ग्वालियर के भितरवार में आयोजित एक बौद्ध सम्मेलन के दौरान मंच से बौद्ध अनुयायियों ने सनातन धर्म के हिंदू देवी देवताओं को ना मानने की शपथ दिलाई।

दरअसल भितरवार के धाकड़ खिरिया गांव में स्थित बुद्ध विहार में हुए तीन दिवसीय सम्मेलन में हजारों लोगों को धर्मांतरण की शपथ दिलाई गई। भदंत शाक्यपुत्र सागर महाथेरो द्वारा दिलाई गई इस शपथ में हिंदू धर्म के देवी देवताओं ब्रह्मा विष्णु महेश और दुर्गा माता को नहीं मानने की बात कही गई है। इस वीडियो में आप सुनेंगे कि बिना आयोजन समिति और प्रशासन से अनुमति लिए बगैर किस तरह से हजारों लोगों का धर्मांतरण किया जा रहा है। वही जब कार्यक्रम के आयोजक और 96 जाटव गाँव समाज सुधार समिति के अध्यक्ष रूपेंद्र वर्मा से इस बात की जानकारी ली गई तो उन्होंने डॉ भीमराव अंबेडकर के 22 सूत्रों का हवाला देते हुए घटना से पल्ला झाड़ लिया। भितरवार में हुए इस धर्मांतरण के बाद हिंदू संगठन लामबंद हो गए हैं. अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने इस धर्मांतरण को सनातन धर्म के विरुद्ध साजिश माना है। हिंदू महासभा का कहना है कि जिन हिंदू सनातनियों को बरगलाकर बौद्ध धर्म में शामिल किया जा रहा है उनकी आरक्षण की सुविधाएं बंद कर दी जाएँ। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने इस पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है की मध्य प्रदेश में दलितों के साथ अत्याचार बढ़ रहे हैं यही वजह है इतनी बड़ी संख्या में लोग बौद्ध धर्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं। भारत की संवैधानिक व्यवस्था में हर आदमी को अपने धर्म का चयन और प्रचार प्रसार का अधिकार है। प्रशासन किसी भी अधिकार से इस पर कार्रवाई नहीं कर सकता।

वहीं दूसरी प्रशासन इस धर्मांतरण को पूरी तरह खारिज कर रहा है एसडीएम संजीव जैन का कहना है कि ये मामला धर्मांतरण का नहीं है, समिति के आयोजक से पूछताछ हुई है हमने प्रतिवेदन लिया है यदि ऐसी कोई बात आती है तो कार्रवाई की जाएगी।

 

आपको बता दें कि मुगलकाल में इस्लाम मजहब में लालच दबाव और तलवार के जोर पर धर्मांतरण करवाया जाता था। उसके बाद अंग्रेजी शासनकाल में वर्षों तक ईसाइयत का प्रचार देश के गरीब दलित और ग्रामीण इलाकों में बड़े स्तर पर धर्मांतरण का हथियार बना। लेकिन आजादी के बाद सरकारों द्वारा लिए तबके को तमाम सुविधाएँ मुहैया कराने के बाद भी दलित तबका संतुष्ट नजर नहीं आता। अब ओबीसी और मुस्लिम समुदाय भी एकजुटता का दम भर रहे हैं जिससे आने वाले दिनों में सरकार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।बहरहाल इस तरह के सामूहिक धर्मांतरण का आयोजन सनातन के लिए कितना नुकसानदेह साबित होगा ये आने वाला बताएगा लेकिन यह जरूर है कि यदि समाज सुधार के आयोजनों के नाम पर चलने वाले इस कुचक्र को नहीं रोका गया तो वो दिन दूर नहीं जब सनातन केवल इतिहास की किताबों में सिमट कर रह जाएगा। इस मामले में सरकार भी दखल नहीं दे रही क्योंकि दलितों का वोट बैंक खिसकने का खतरा है लेकिन विश्व बंधुत्व और सर्व धर्म समभाव का नारा देने वाले विश्व का एकमात्र सनातन धर्म को मानने वालों को दलित ओबीसी और अन्य समाजों के अनुयाइयों के साथ सामंजस्य बिठाना होगा जिससे धर्मांतरण की साजिश को नाकाम किया जा सके क्योंकि धर्मांतरण देश तोड़ने की दिशा में पहला कदम हो सकता है।

 

बाइट-: जयवीर भारद्वाज (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अखिल भारतीय हिन्दू महासभा)

बाइट -: रूपेंद्र वर्मा अध्यक्ष 96 जाटव गाँव समाज सुधार समिति

बाइट-: संजीव जैन एसडीएम

बाइट-: आर पी सिंह (प्रदेश प्रवक्ता कांग्रेस)

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