अम्बेडकर या बी एन राव नहीं अंग्रेज वायसराय था संविधान निर्माता
पूर्व सांसद महेश चंद्र शर्मा ने लॉर्ड वेवेल को बताया संविधान निर्माता
देश का संविधान विदेशी है….??? सबसे बड़ा खुलासा
देश के संविधान के निर्माता थे लॉर्ड वेवेल
डा अम्बेडकर या डॉ बी एन राव नहीं बल्कि अंग्रेजी वायसराय लॉर्ड वेवेल था संविधान निर्माता
एकात्म मानव दर्शन के हीरक जयंती समारोह में असली संविधान निर्माता का हुआ खुलासा
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और पूर्व सांसद महेश चन्द्र शर्मा ने किया संविधान निर्माता का खुलासा
कहा- अंग्रेजों के बनाए संविधान को बीएन राव ने किया था संशोधित
डॉ भीमराव अम्बेडकर ने तत्कालीन ब्यूरोक्रेट बी एन राव द्वारा तैयार प्रारूप को संविधान सभा के समक्ष पेश किया
अंग्रेजों ने देश का राज काज चलाने के लिए बनवाया था संविधान
संविधान बनवाते समय नहीं पता था कि देश छोड़कर चले जाएंँगे अंग्रेज
अखंड भारत के लिए बनाए गए संविधान को खंडित भारत में लागू किया गया
महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की अवधारणा के अनुरूप नहीं था संविधान
अब भी जनमत के मुताबिक संविधान को ग्राम स्वराज और राम राज्य के अनुसार संशोधन संभव।
देखिए खास रिपोर्ट
महेश चंद्र शर्मा (पूर्व सांसद एवं मुख्य वक्ता, एकात्म मानव दर्शन हीरक जयंती समारोह)
अध्यक्ष एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान
ग्वालियर में एकात्म मानव दर्शन की हीरक जयंती के आयोजन के मौके पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और पूर्व सांसद महेश चंद्र शर्मा ने भारत के संविधान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना था कि भारत के संविधान के निर्माता ना तो डॉक्टर भीमराव अंबेडकर हैं और ना ही बी एन राव। उनका यह भी कहना है कि भारत के संविधान का निर्माण गांधी जी की मंशा के अनुरूप नहीं हुआ क्योंकि जिस तरह से महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज के तहत संविधान की परिकल्पना की थी यह संविधान में कहीं दिखाई नहीं देती। अंग्रेजी शासन काल में वायसराय लॉर्ड वेवेल के कहने पर बी एन राव द्वारा तैयार किए गए प्रारूप को संविधान सभा में डॉ भीमराव अंबेडकर ने विद्वत्तापूर्ण तरीके से पेश किया जो की ऐतिहासिक है। उनका यह भी कहना है की डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और बी एन राव में किसी तरह का मतभेद नहीं है हमें अपने महापुरुषों को छोटा करके नहीं देखना चाहिए। दरअसल जब संविधान बना उस समय भारत की आजादी की कल्पना भी नहीं थी अंग्रेजों ने अपने राज्य कार्य को सुचारू रूप से चलने के लिए संविधान का निर्माण बीएन राव से करवाया था। बीच में घटनाक्रम कुछ ऐसा हुआ कि अंग्रेजों को देश छोड़कर जाना पड़ा और उसके बाद जो संविधान पराधीन और अखंड भारत के लिए बनाया गया था जिसे विभाजित भारत में लागू कर दिया गया।
वही इस मामले में ओबीसी महासभा के नेता एडवोकेट विश्वजीत रतौनिया का कहना है की महेश चंद्र शर्मा का यह बयान अंग्रेजों के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है उन्होंने यह भी कहा की बाबा साहब अंबेडकर द्वारा रचित संविधान जो देश की धरोहर है अंग्रेजों द्वारा लिखा जाना बाहर बाबा साहब के प्रति एक षड्यंत्र के तौर पर नजर आता है पूर्व सांसद महेश चंद्र शर्मा जिस बैकग्राउंड से आते हैं उसने कभी संविधान को नहीं माना तिरंगे का सम्मान नहीं किया। इस बयान पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होना चाहिए और मुकदमा चलना चाहिए। ग्वालियर हाईकोर्ट में बी एन राव की प्रतिमा लगाने के पक्षधर और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट पवन पाठक का कहना है कि इस संविधान का मसौदा अंग्रेजों के कहने पर ही तैयार किया गया था अंग्रेजों द्वारा बनाए गए इंडियन एक्ट 1935 की 280 सैक्शन जस के तस भारतीय संविधान में जोड़े गए बाकी बचे हुए सैक्शन डॉ बी एन राव द्वारा कई देशों की यात्रा करने के बाद शामिल किए गए थे। बहरहाल जो भी हो लेकिन इस बार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन के हीरक जयंती समारोह के मुख्य वक्ता महेश चन्द्र शर्मा ने देश के सामने संविधान निर्माण की बहस जरूर प्रारंभ कर दी है।
