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मध्यप्रदेश में किसान के साथ लूट-खसोट जारी_मंडी बोर्ड सिंडिकेट का कारनामा

गंदा है पर धंधा है ये_मंडी बोर्ड और व्यापारियों के नेक्सस का दो लाख क्विंटल धान का महाघोटाला 

अन्नदाता के साथ सरकार का छलावा

मंडी सिंडिकेट का 2 लाख क्विंटल धान का महाघोटाला

मध्यप्रदेश में व्यापारी अधिकारी और सरकार किसानों को छल रही है और ये हम नहीं कह रहे सिस्टम द्वारा किया जा रहा यह छलावा खुद किसान अपने मुंह से बयान कर रहे हैं। ग्वालियर की कृषि उपज मंडी में अपने खून पसीने से सींच कर उगाई गई फसल को बेचने वाले किसान अब दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं। मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड के संरक्षण में ग्वालियर कृषि उपज मंडी के अधिकारियों और व्यापारियों द्वारा डेढ़ हजार किसानों के साथ दगा करते हुए 2 लाख क्विंटल से ज्यादा धान को खुर्द बुर्द कर दिया। यही नहीं किसानों की फसल उधारी पर लेकर उसे बैंक में गिरवी रख कर लोन भी ले लिया अब बैंक उस फसल को अपना बता रही हैं। जिस अन्नदाता ने अपने परिवार का पेट भरने के लिए फसल बेची थी उसे व्यापारी सरकार मंडी और प्रशासन हर किसी ने धोखा दिया। देखिए Exclusive रिपोर्ट

ग्वालियर की कृषि उपज मंडी के कार्यालय में खड़े यह अन्नदाता अपनी फसल का दाम लेने के लिए पिछले एक साल से चक्कर लगा रहे हैं। मंडी के तत्कालीन सचिव कदम सिंह समेत तीन फर्मों पर किसानों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप है जिसमें से मंडी सचिव कदम सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है वहीं इस घोटाले का मास्टरमाइंड कल्याण सिंह समेत अन्य आरोपियों को अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया है। आपको बता दें कि आरोपियों ने किसानों के साथ ही नहीं बल्कि बैंक के साथ भी एक बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया था जिसके तहत किसानों से उधारी पर खरीदी गई धन को एक वेयरहाउस में रखकर उसे पर सेंट्रल बैंक आफ इंडिया से लोन ले लिया था। याचिका कर्ता के एडवोकेट अभिनव भार्गव के मुताबिक सेंट्रल बैंक में कोर्ट में आपत्ति लगाई है की वेयरहाउस में रखे गए धान पर तीनों फार्मो ने लोन लिया था इसलिए इस धान की फसल की कीमत सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया को दी जाए। यहां व्यापारी अधिकारी और मंडी बोर्ड के संचालक के साथ प्रशासन के बड़े नेक्सस ने किसानों के साथ जिस तरह से धोखाधड़ी की है उससे तो यही लगता है कि किसानों को अपनी फसल का दम मिलने में अभी काफी समय लगने वाला है। क्योंकि मामला कोर्ट में है और कोर्ट बहुत जल्दी न्याय नहीं करता केवल तारीख पर तारीख है देता है लेकिन यह तारीख है किसानों के जख्मों पर नमक की तरह काम करेगी और इस बार भी किसानों की दिवाली काली रह जाएगी।

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