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MPCCI की महाभारत में अपनों से जंग_आखिर क्यों दुखी हैं वरिष्ठजन

मध्यप्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स के चुनाव में अपने ही बगावत पर उतरे,

वरिष्ठ सदस्यों की पीड़ा_6 बार जिताने के बाद भी अलगाव से हुआ दुख

ग्वालियर में मध्यप्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चुनाव की घड़ी आने में कुछ दिनों का फासला है प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार और जनसंपर्क जारी है। कहने को तो यह मुकाबला व्हाइट हाउस और क्रियेटिव हाउस के बीच है लेकिन ये चैम्बर के इतिहास में पहली‌ बार है कि इस बार चैम्बर की सियासत में अपनों ने ही अपनों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है जिसे लेकर चैम्बर ऑफ कॉमर्स के वरिष्ठ सदस्यों का मन विचलित है वे दुखी हैं कि एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षी सोच के चलते चैम्बर का सबसे ताकतवर माना जाने वाला व्हाइट हाउस दो धड़ों में बंट गया। हालांकि इस व्हाइट हाउस को कमजोर करने वाली उठापटक के बाद भी पारस जैन को व्यापारियों का भरपूर समर्थन हासिल हो रहा है। दाल बाजार में जनसंपर्क करने पहुंचे व्हाइट हाउस के अध्यक्ष पद प्रत्याशी पारस जैन का व्यापारियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत करना तो यही दर्शाता है।

राजनीति में ये होता है कि सत्ता के लिए अपने ही अपनों के खिलाफ हो जाते हैं। राजनीतिक पार्टियों में अक्सर बगावत देखी जाती है लेकिन बड़ा सवाल तब उठता है जब चैम्बर ऑफ कॉमर्स जैसे गैर राजनीतिक व्यापारिक संगठन में एक ही हाउस में दो फाड़ हो जाए। यही नहीं जब चैम्बर में सत्तासीन व्यक्ति अपना वर्चस्व कायम रखने की होड़ में इस कदर डूब जाए कि हाउस के द्वारा अधिकृत किए गए प्रत्याशी को ही‌ नकार दे और सत्ता सिंहासन पर कब्जा बरकरार रखने के लिए अपनों के खिलाफ ही मैदान में उतर आए। बहरहाल इस बार व्हाइट हाउस के प्रत्याशी पारस जैन का मुकाबला क्रिएटिव हाउस से नहीं है बल्कि अपने हाउस से बगावत कर चुके प्रवीण अग्रवाल से है जिन्हें क्रिएटिव हाउस की अघोषित समर्थन प्राप्त है क्योंकि क्रिएटिव हाउस ने अपना अध्यक्ष पद का प्रत्याशी नहीं उतारा है। इसलिए प्रवीण अग्रवाल का अपनों से बगावत करने के बाद क्रिएटिव हाउस में जाना तय माना जा रहा है। दूसरी ओर पारस जैन अपनी जीत को लेकर उत्साहित हैं वे कहते हैं कि मैं व्यापारियों के लिए हमेशा से ही खड़ा रहा हूंँ और यदि मुझे व्यापारी अपना अमूल्य मत देकर जिताएंगे तो मैं भी व्यापारियों की तन मन‌ धन से सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ। लेकिन अपनों की बगावत के बाद इस लड़ाई में पारस कितने सफल हो पाते हैं ये आने वाला वक्त बताएगा।

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