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जमीन से 30 फीट ऊपर मजदूरों का स्टंट_एलीवेटेड रोड निर्माण में सुरक्षा की अनदेखी

1100 करोड़ की एलीवेटेड रोड पर खतरों के खिलाड़ी_

विभागीय उदासीनता कंपनी की लापरवाही क्या हादसों को न्यौता दे रही….?

ग्वालियर का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बलि मांग रहा है और ये हम नहीं कह रहे ये तस्वीरें बयान कर रही हैं जी हाँ ग्वालियर के 1100 करोड़ के प्रोजेक्ट एलीवेटेड रोड निर्माण में खतरों के खिलाड़ियों का प्रवेश हो चुका है। दरअसल ये खतरों के खिलाड़ी वे हैं जो अपने परिवार को पालने के लिए के लिए अपनी जान जोखिम डालने से नहीं घबराते। चाहे इन्हें इसके लिए अपनी जान ही हथेली पर क्यों न रखनी पड़े। एलीवेटेड रोड से शहर के बढ़ते और ट्रैफिक से निजात पाने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन जो मजदूर एलीवेटेड रोड का निर्माण कर रहे हैं उनके विषय में किसी ने सोचा। क्या उस कंस्ट्रक्शन कंपनी को इन मजदूरों की जान की परवाह है या उस विभाग को अपनी जान खतरे में डालने वाले श्रमिकों की चिंता है। हमने जब लोकनिर्माण विभाग सेतु के कार्यपालन यंत्री जोगेंद्र यादव से बात की तो उनका कहना था कि हमने निर्धारित सुरक्षा मापदंडों को लेकर पीएनसी कंपनी को नोटिस भी दिए हैं और पेनल्टी भी लगाई है। लेकिन बड़ा सवाल उठता है कि क्या किसी भी पेनल्टी से एक भी मजदूर की जान लौटकर आ पाएगी। तस्वीरों में आप देखेंगे कि ग्वालियर की एलीवेटेड रोड के 30 फीट ऊँचे गर्डरों पर खतरों के खिलाड़ियों का स्टंट कि कैसे बिना कि सुरक्षा के कुछ मजदूर अपनी जान हथेली पर रखकर दौड़े चले जा रहे हैं वो ही उस समय जब अंचल में आंधी पानी का मौसम आ चुका है और जरा सी हवा चली या पैर फिसला तो सीधे नीचे और फिर होता है मौत के बदले मुआवजे का खेल कंपनी भी तभी जागती है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है। लेकिन ये कंपनी और विभाग क्या उस मजदूर के परिवार का दर्द समझ पाएंगे जो अपना एकमात्र कमाने वाला को देता है। क्या दुनिया की कितनी भी बड़ी रकम उस मजदूर की जिंदगी को वापस ला पाएगी जो कंपनी की लापरवाही और शासकीय विभागों की उदासीनता के चलते खत्म हो चुकी होगी। गनीमत है कि अब तक ऐसा हुआ नहीं है लेकिन इस तरह की लापरवाही रही तो शायद वो दिन भी दूर नहीं जब कोई मजदूर असमय काल के गाल में समा जाएगा।

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