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ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला का काला सच_कौन हैं गौवंश के हत्यारे

मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला में निराश्रित गौवंश की मौत का तांडव,
गायों की मौत के गुनहगारों पर सबसे बड़ा खुलासा

ये गौशाला है या मौत का कुआँ

मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला में गायों की मौत

बेसहारा गौवंश को सहारा देने के नाम पर हुए फर्जीवाड़े का खुलासा

गायों की मौत का गुनहगार कौन_गौशाला प्रबंधन/पॉलीथिन या फिर संवेदनहीन अफसर

10 हजार गौवंश पर केवल 15 पशु चिकित्सक_

जागरूक युवती ने किया गायों की मौत का भंडाफोड़

रात एक बजे तक धरने पर बैठी रही लेकिन नहीं जागे निगमायुक्त

निगमायुक्त संघप्रिय की संवेदहनहीनता का घिनौना नजारा

हर रोज दर्जनों गौवंश मौत के मुँह में समा रहा

निरपराध निर्दोष और मासूम गौवंश की मौत का गुनहगार कौन

शहर में पॉलीथिन की बिक्री धड़ल्ले से जारी_नगर निगम नींद में

पॉलीथिन से हजारों गायों की मौत का पाप किसके सिर

गौशाला और पॉलीथिन दोनों पर ग्वालियर नगर निगम का नियंत्रण

गाय को माता मानने वाले ही गौवंश को मौत के मुँह में धकेल रहे

गौवंश के पेट में पॉलीथिन गायों की मौत का सबसे बड़ा कारण

महापौर शोभा सिकरवार की गौवंश के प्रति उदासीनता से गौशाला प्रबंधन की बल्ले बल्ले

महापौर ने अब तक नहीं ली गौवंश को बचाने की सुधि

 

कांग्रेस की गौ वंश की नीति के तहत महापौर ने दी गायों को तिलांजलि

ग्वालियर में मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला लाल टिपारा में गायों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यही नहीं जब कोई जागरूक नागरिक या समाजसेवी शहर में बेसहारा भटक रहे गौवंश को गौशाला में पहुँचाता है तो उसे या तो यहाँ दिखावे के लिए भर्ती तो किया जाता है लेकिन गौशाला पर बोझ होने के चलते उसे भगा दिया जाता है। और फिर भी कोई शिकवा शिकायत करे तो उस गौवंश को मिलती है मौत। ये सुनकर आप चौंक जाएंगे लेकिन सच यही है।

ताज़ा मामला सड़कों पर बेसहारा भटक रही बीमार गाय का है जिसे एक गौ प्रेमी महिला हिमांचली मिश्रा द्वारा 23 जुलाई को गौशाला में भर्ती कराया गया था जिसके बाद वही गाय सड़कों पर पाई गई क्योंकि जैसा कि हिमांचली मिश्रा का आरोप है कि गौशाला प्रबंधन ने बीमार गाय को इलाज देने की बजाय उसे गौशाला से बाहर भगा दिया। जब हिमांचली ने उसी गाय को सड़क पर देखा तो उन्होंने निगमायुक्त संघ प्रिय से इसकी शिकायत की जिसके बाद निगम अमला हरकत में आया और गौमाता को एक बार फिर रहने को आसरा मिल गया। लेकिन उस बेजुबान गौमाता को क्या मालूम था कि यह गौशाला नहीं बल्कि मौत का ऐसा कुआं है जहाँ से वापस लौटना किसी भी गौवंश‌ के लिए सपने जैसा है तो निगमायुक्त संघ प्रिय को दी गई शिकायत पर जांच के आदेश के दूसरे दिन ही गाय ने‌ अपने प्राण त्याग दिए ये गौशाला प्रबंधन का कहना है। लेकिन हिमांचली मिश्रा को जैसे ही गाय की मौत की जानकारी मिली तो वे गौशाला के बाहर धरने पर बैठ गईं। उनका आरोप था कि गौशाला प्रबंधन की लापरवाही से इस गौमाता की जान गई है। वहीं दूसरी ओर गौशाला प्रबंधन की तरफ से नोडल अधिकारी डॉ ने बताया कि गौवंश‌ की सबसे बड़ी दुश्मन पॉलीथिन है पॉलीथिन खाने वाली गाय को बचाना संभव नहीं होता और जब दूध खत्म हो जाता है गाय के मालिक उन्हें सड़कों पर छोड़ देते हैं। हमने इस गाय का इलाज किया था लेकिन गाय की कमजोर इम्यूनिटी और पेट में मिली भारी मात्रा में पॉलीथिन ने गाय की जान ले ली। हिमांचली मिश्रा ने गौशाला प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं आपको बता दें कि यहां लगभग 10 हजार गौवंश के इलाज के लिए मात्र 15 पशु चिकित्सक ही उपलब्ध हैं। अब देखना यह है कि लगातार होती गौवंश की मौत और सड़कों पर निराश्रित गौवंश की मौतों को लेकर नगर निगम के मुखिया संघ प्रिय कितने संवेदनशील हैं क्योंकि शहर में पॉलीथिन की आपूर्ति और बिक्री पर भी नगर निगम का कंट्रोल है और गौवंश की होती मौतों पर भी।

 

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