ग्वालियर में अवैध ISBT के सवाल पर भागे मंत्री
T and CP नगर निगम की बिना अनुमति के बना दिया अंतर्राज्यीय बस अड्डा
स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन का स्मार्ट घोटाला
एंकर-: सैयां भए कोतवाल तो डर काहे का यह कहावत मध्य प्रदेश में एकदम सही साबित होती है क्योंकि यह एक ऐसा राज्य है जहां सैया कोतवाल ही सरकार के बनाए गए नियम कानूनों को ध्वस्त कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के पॉलीटिकल पावर सेंटर माने जाने वाले ग्वालियर में सरकार कुछ भी कर सकती है सरकार के लिए सब कुछ जायज है और कोई इस पर सवाल नहीं कर सकता क्योंकि हम कोतवाल हैं।
आपने अक्सर देखा होगा इस शहर में कहीं भी कोई बड़ी इमारत बनती है या कोई अपने लिए अपने परिवार के लिए छोटा सा आशियाना बनाता है तो उसके पास नगर निगम जिला प्रशासन और निर्माण से संबंधित तमाम सारे विभागों के कर्मचारी पहुंच जाते हैं और कई बार ऐसे बिना अनुमति किए गए निर्माण को जमींदोज कर देते हैं।
ताजा मामला ग्वालियर में चल रहे विकास कार्यों का है जहाँ टाउन एंड कंट्री कंट्री प्लानिंग और नगर निगम की अनुमति के बगैर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट आकार ले रहे हैं। क्या आपको पता है कि ग्वालियर के बड़े प्रोजेक्ट में से एक 70 करोड़ की लागत से बनने वाला इंटर स्टेट बस टर्मिनल अवैध घोषित हो गया है। और इस अवैध बिल्डिंग को बनाने वाली स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन ने अब तक न तो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की परमीशन ली और न ही नगर निगम से किसी तरह की अनुमति मांगी है और बात यहीं तक होती तो गनीमत थी यहाँ तो सरकार ने ही सरकारी नियमों का उल्लंघन करते हुए इस ग्आरीन लैंड में आने वाली इस जमीन के लैंड यूज को चेंज तक नहीं करवाया आम जनता के पैसे को अपने हिसाब से बर्बाद करने वाले स्मार्ट सिटी के लाट साहबों को शायद ये नहीं पता कि यहाँ लाखों यात्रियों का आवागमन होगा लेकिन उनकी सुरक्षा को दरकिनार कर किसी भी विभाग की परमीशन नहीं ली गई और यही नहीं ग्वालियर के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट भी इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए नजर आए। और जांच करने की बात कहकर चलते बने।
