Headlines

नया सौ दिन पुराना नौ दिन_नई भाजपा बनाम पुरानी भाजपा_स्थापना दिवस पर पूर्वजों को भूले नेता

पितृपुरूषों के त्याग समर्पण और बलिदान को भूलती नई भाजपा_जहाँ से उदय हुआ उसे ही भूले वरिष्ठ नेता

सत्ता सुख में अपनी विरासत को भूलते भाजपाई

भाजपा की नींव रहे पितृ पुरुषों का त्याग बलिदान की अनदेखी

कौन सुनेगा ग्वालियर भाजपा के कार्यालय मुखर्जी भवन की सुनसान पड़ी इमारत की दीवारों का दर्द

स्थापना दिवस पर कभी भाजपा को शरण देने वाली इमारत में पसरा सन्नाटा

कुशाभाऊ ठाकरे, श्यामा प्रसाद मुखर्जी दीनदयाल उपाध्याय और अटलजी की विरासत को बुलाती भाजपा

क्या बदल चुकी है नई भाजपा की नीयत और नीति

युवा कार्यकर्ताओं को कैसे करेंगे प्रेरित

क्या भाजपा के पितृ पुरुषों को भुला देगी भाजपा की नई पीढ़ी

विश्व की सबसे बड़ी पार्टी यानी भाजपा ने अपने पितृ पुरुषों के बलिदान और विरासत को भुला दिया है और यह हम नहीं कह रहे यह बयान कर रही हैं ग्वालियर के ऐतिहासिक भाजपा कार्यालय मुखर्जी भवन की सूनी दीवारें। जहांँ स्थापना दिवस के दिन पूरे कार्यालय में सन्नाटा पसरा है। यह वही दीवारें हैं जहां से उठकर जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी बने राजनीतिक दल ने सम्पूर्ण भारत में अपनी पार्टी का परचम बुलंद किया है। कारण सिर्फ इतना सा है की समर्पण संस्कार त्याग और बलिदान की उस परंपरा ने अब मेगा इवेंट की शक्ल ले ली है। आज ग्वालियर में एक केंद्रीय मंत्री एक विधानसभा अध्यक्ष और चार पाँच मंत्री के साथ एक स्थानीय सांसद भी मौजूद रहे किंतु सत्ता के मद में चूर एक भी नेता ने मुखर्जी भवन की ओर अपना रुख करना मुनासिब नहीं समझा अब इसे क्या कहें कि शुचिता और संस्कार की दुहाई देने वाली पार्टी अपने युवा कार्यकर्ताओं को क्या संदेश दे रही है। देखिए भाजपा की दिशा और दशा बदलती ऊंगली डॉट इन की ये खास रिपोर्ट।

 

Please follow and like us:
Pin Share
INSTAGRAM