पितृपुरूषों के त्याग समर्पण और बलिदान को भूलती नई भाजपा_जहाँ से उदय हुआ उसे ही भूले वरिष्ठ नेता
सत्ता सुख में अपनी विरासत को भूलते भाजपाई
भाजपा की नींव रहे पितृ पुरुषों का त्याग बलिदान की अनदेखी
कौन सुनेगा ग्वालियर भाजपा के कार्यालय मुखर्जी भवन की सुनसान पड़ी इमारत की दीवारों का दर्द
स्थापना दिवस पर कभी भाजपा को शरण देने वाली इमारत में पसरा सन्नाटा
कुशाभाऊ ठाकरे, श्यामा प्रसाद मुखर्जी दीनदयाल उपाध्याय और अटलजी की विरासत को बुलाती भाजपा
क्या बदल चुकी है नई भाजपा की नीयत और नीति
युवा कार्यकर्ताओं को कैसे करेंगे प्रेरित
क्या भाजपा के पितृ पुरुषों को भुला देगी भाजपा की नई पीढ़ी
विश्व की सबसे बड़ी पार्टी यानी भाजपा ने अपने पितृ पुरुषों के बलिदान और विरासत को भुला दिया है और यह हम नहीं कह रहे यह बयान कर रही हैं ग्वालियर के ऐतिहासिक भाजपा कार्यालय मुखर्जी भवन की सूनी दीवारें। जहांँ स्थापना दिवस के दिन पूरे कार्यालय में सन्नाटा पसरा है। यह वही दीवारें हैं जहां से उठकर जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी बने राजनीतिक दल ने सम्पूर्ण भारत में अपनी पार्टी का परचम बुलंद किया है। कारण सिर्फ इतना सा है की समर्पण संस्कार त्याग और बलिदान की उस परंपरा ने अब मेगा इवेंट की शक्ल ले ली है। आज ग्वालियर में एक केंद्रीय मंत्री एक विधानसभा अध्यक्ष और चार पाँच मंत्री के साथ एक स्थानीय सांसद भी मौजूद रहे किंतु सत्ता के मद में चूर एक भी नेता ने मुखर्जी भवन की ओर अपना रुख करना मुनासिब नहीं समझा अब इसे क्या कहें कि शुचिता और संस्कार की दुहाई देने वाली पार्टी अपने युवा कार्यकर्ताओं को क्या संदेश दे रही है। देखिए भाजपा की दिशा और दशा बदलती ऊंगली डॉट इन की ये खास रिपोर्ट।
