ऊर्जा मंत्री जी ये ऊर्जा आपको जनता ने ही दी है और आप इसे जनता की गलती बता रहे हैं…

मामला ग्वालियर की सब्जी मंडी का है जहाँ सरल सौम्य और सहज माने जाने वाले मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री बारिश में मंडी का जायजा लेने पहुंचे थे लेकिन यहाँ के हालात देखने के बाद उन्होंने सब्जी विक्रेताओं को ही दोषी दे डाला। जब भरी कीचड़ और गंदगी में सब्जी बेचने को मजबूर सब्जी विक्रेताओं ने उनसे अपनी व्यथा कहनी चाही तो मंत्री जी ने बेचारे गरीब सब्जी बेचने वालों को ही दोषी ठहरा दिया।
देखिए वीडियो…
अब हमारी समझ में ये बात नहीं आई कि गलती सब्जी वालों की कौनसी है क्या वे अपना पुराना जमा जमाया धंधा छोड़ कर नई मंडी में आने को राजी हुए ये गलती थी..?
क्या मंत्री जी की बात मानकर सभी सब्जी विक्रेताओं ने दुकान के बदले ठेले पर सब्जी बेचने को मजबूर हुए ये गलती थी…?
या फिर अपना धंधा छोड़ने के बाद भी आपको वोट दिया ये सबसे बड़ी ग़लती थी…?
हालांकि एक व्यक्ति ने हिम्मत करके कह दिया कि कि पट्टे का क्या करेंगे जब दो वक्त की रोटी नहीं होगी क्योंकि मंत्री जी ने एहसान जताते हुए कहा कि मैं तुम्हें पट्टा दे रहा था जैसे कि मंत्री जी अपनी जेब से जमीन खरीद कर सब्जी बेचने वालों को पट्टा दे रहे हों, यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि अमूमन हर नेता जनता के वोटों से हासिल करने और जीतने के बाद एहसान जताता है कि जो कर रहा हूँ मैं कर रहा हूँ, भरी बारिश में सब्जी मंडी के निरीक्षण की खबर तो मंत्री जी के जनसंपर्क का हिस्सा भी नहीं बनी क्योंकि ऐसा कुछ तो हुआ था जो मंत्री को नागवार गुजरा।
एक बार फिर से सुनिए मंत्री जी की जुबानी जनता की गलतियों की कहानी
ये गलती तुम्हारी है….
गलती तुम्हारी…
