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शिक्षा विभाग में एक फूल दो माली_क्या है वो फूल (कुर्सी) जिसे छोड़कर नहीं जाना चाहते अरविंद सिंह_और क्यों

JD Office में कुर्सी की मारामारी,

6 माह शेष_फिर भी नहीं छूटता ग्वालियर का मोह,

ऐसा क्या है जिसकी पर्दादारी है_

पूर्व संयुक्त संचालक अरविंद सिंह की चुप्पी के क्या हैं मायने…?

 

ग्वालियर में आखिर ऐसा क्या है जो ग्वालियर का मोह अधिकारियों से नहीं छूटता। चार बार ग्वालियर में रह चुके संयुक्त संचालक अरविंद सिंह का मामला ऐसा ही है जो अपनी सेवा के छह महीने शेष होने पर भी ग्वालियर में टिके रहना चाहते हैं इसका कारण क्या है। क्या कोई ऐसी बात या मामला है जो उनके जाने के बाद तूल पकड़ सकता है या फिर कोई और वजह है आखिर ऐसा क्या है जिसकी पर्दादारी है।

ग्वालियर के सिरोल स्थित लोक शिक्षण विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय में उस समय हंगामा मच गया जब ट्रांसफर किए गए संयुक्त संचालक अरविंद सिंह ने आकर संयुक्त संचालक की कुर्सी पर अपना‌ दावा ठोक दिया। जबकि शासन ने ग्वालियर के संयुक्त संचालक के तौर पर हरिओम चतुर्वेदी को नियुक्ति दी‌ थी। काफी देर तक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच इस बात के‌ लिए असमंजस की स्थिति रही‌ कि वे किसको संयुक्त संचालक मानें। हालांकि बाद में निवर्तमान संयुक्त संचालक को मुख्य कुर्सी नहीं मिली‌ तो वे कार्यालय से‌ चलते बने। बता दें कि बीते दिनों ट्रांसफर की सूची में ग्वालियर के संयुक्त संचालक अरविंद सिंह को भोपाल लोक शिक्षण संचालनालय में तबादला हो गया था जिसके बाद तत्कालीन संयुक्त संचालक अरविंद सिंह ने शासन के आदेश पर कोर्ट से स्टे ले लिया और सीधे अपने ग्वालियर स्थित संयुक्त संचालक कार्यालय पहुंच गए। उनके कार्यालय पहुँचने पर पूरे कार्यालय में अफरातफरी मच गई कर्मचारियों को ये समझ नहीं आ रहा था कि वे किसे अपना अधिकारी मानें। वहीं दूसरी ओर वर्तमान संयुक्त संचालक हरिओम चतुर्वेदी का कहना है कि पूर्व संयुक्त संचालक अरविंद का स्थानांतरण हो गया था लेकिन उन्होंने शासन के आदेश के खिलाफ कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया और उन्होंने रात को शासन को कोर्ट का आदेश भेजा है। अब शासन का जो भी आदेश होगा मैं उसका पालन करने‌ के लिए तत्पर हूँ लेकिन जब तक शासन स्तर पर कोई आदेश नहीं आता है तब तक मैं ही इस पद पर रहने के लिए बाध्य हूँ।

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