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कलेक्ट्रेट के अंधेरे का किलविष कौन…..?

सिस्टम को अंधेरे में रखने वाला कौन….???

बरसात के मौसम में बिजली गुल होना आम बात है क्योंकि मध्यप्रदेश की भौगोलिक आर्थिक सामाजिक राजनैतिक प्रशासनिक और सबसे बड़ी तकनीकी कमियां बिजली के सिस्टम को बाधित करती हैं, और यही नहीं बिजली के जाने पर उदास होने वाले हम लोग बिजली आने के बाद खुशी में झूम उठते हैं कि जैसे कोई कारूँ का खजाना मिल गया हो, लेकिन जब ऊर्जा मंत्री के जिले में सिस्टम ही सिस्टम का शिकार होकर पंगु हो जाए तो आम जनता का दर्द कौन समझेगा, यहाँ कलेक्ट्रेट परिसर में बत्ती गुल होने पर सारा सिस्टम धराशाई हो जाता है क्योंकि पुराने जमाने की कहावत बिन पानी सब सून की जगह एक अलग मुहावरा बिन बिजली सब सून इस ज़माने में चरितार्थ होता नजर आ रहा है देखिए ungali.in की ये खास रिपोर्ट

अंधेरा कायम रहे…. ये डॉयलॉग अक्सर बचपन में आने वाले शक्तिमान सीरियल में सुना जाता था और हो भी क्यों न यह अंधेरे के सम्राट किलविष तमराज का फेवरिट था और बच्चे भी इसे देखकर तालियां बजवाते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि शक्तिमान आकर इस अंधेरे के शैतान को खत्म कर देगा लेकिन अब लगता है कि ग्वालियर में अंधेरे का शैतान किलविष के कदम पड़ चुके हैं, हम यहाँ बिजली की किल्लत से जूझती जनता की बात नहीं कर रहे हम उन संस्थाओं की भी बात नहीं कर रहे जहां बिजली जाने से मजदूर खाली हाथ बैठे रहते हैं और उन्हें उस दिन की दिहाड़ी नहीं मिलती, हम बात कर रहे हैं उसे सिस्टम की जो देश चलाता है प्रदेश चलाता है और जिलों को भी वही सिस्टम चलाता है, ग्वालियर का एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस यानी कलेक्ट्रेट कार्यालय में अंधेरा कायम है और यहां के अधिकारी कर्मचारी सभी हाथ पैर हाथ भरकर बैठे हैं क्योंकि बिजली नहीं है ऊर्जा मंत्री के गृह क्षेत्र में इससे बड़ी शर्मनाक बात हो नहीं सकती जहां सिस्टम को चलाने वाले कार्यालय की बिजली घंटों तक गायब हो और इसके चलते पूरे कलेक्ट्रेट कार्यालय के कंप्यूटर समेत समूचा सिस्टम पूरी तरह फेल हो जाए, महिला बाल विकास के सभी कम्प्यूटर बंद हैं सारे अधिकारी कर्मचारी खाली बैठे गप्पें लड़ा रहे हैं, खनिज विभाग के अधिकारी तो अपने केबिन से ही गायब हैं और कर्मचारी बाहर खड़े हैं क्योंकि बिजली नहीं है, जिला खाद्य कार्यालय के अंधेरे कमरों में घुसने से ही डर लग रहा है क्योंकि एक भी व्यक्ति पूरे कार्यालय में नजर नहीं आया, इसके साथ ही तमाम एसडीएम ऑफिस का नजारा देखने योग्य था यहाँ तो मोबाइल की टॉर्च में फाइलें खंगाली जा रही थीं बेचारे जुझारू कर्मचारी और एक दो वकील अलमारी में से फाइलें चैक कर रहे थे, हालांकि कई एसडीएम के कार्यालयों के दरवाजे बंद थे तो किसी के कर्मचारी कुर्सी पर पैर पसारे अपनी‌ थकान दूर कर रहा था, बहरहाल जो भी हो लेकिन बड़ा सवाल ये उठता है कि जब कलेक्टर कार्यालय के हर कोने में अंधेरे का साम्राज्य फैला हो तो जनता के कामों का क्या होगा, क्या ऊर्जा मंत्री इस ओर ध्यान देंगे।

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