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चम्बल का बंदूकबाज विधायक… देखिए

ग्वालियर चम्बल में गरजीं सैंकड़ों बंदूकें,
भाजपा विधायक ने निभाई दबंगई के साथ परम्परा,
यहाँ पुलिस प्रशासन की औकात नहीं कि कुछ उखाड़ पाए…!

ग्वालियर चम्बल अंचल में गन कल्चर का नजारा आम तौर पर देखने को मिल जाता है, यहाँ शादी समारोह या किसी भी कार्यक्रम में बंदूकों और हथियारों का प्रदर्शन शान समझा जाता है, और सही भी है क्योंकि चम्बल के पानी में बात ही कुछ ऐसी है कि यहाँ कोई भी आम आदमी भी गलत बात सहन नहीं करता और बगावत कर देता है।
सदियों से ग्वालियर चम्बल की यही पहचान रही है और रहनी भी चाहिए क्योंकि किसी भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र को अपनी पहचान रखने का अधिकार संविधान ने ही दिया है। लेकिन बदलते दौर के साथ ग्वालियर चम्बल अंचल भी आधुनिकता की बयार में इतना अधिक श्रम गया है कि अपनी प्राचीन भारतीय परम्पराओं और इतिहास को भूलता जा रहा है।आज के युवाओं को मोबाइल और इंटरनेट से सिर उठाकर देखने की फुर्सत नहीं है। हालांकि इसके भी बहुत सारे कारण हैं बुजुर्ग ही अब परम्पराओं की बात नहीं करते उन्हें अपनी भावी पीढ़ी के भविष्य की चिंता है।
लेकिन कुछ लोग हैं जो पुरानी परम्पराओं और संस्कृति को सहेजकर रखे हुए हैं ऐसे ही एक महानुभाव हैं ग्वालियर के प्रीतम लोधी जो वर्तमान में भाजपा विधायक हैं और देशी‌ खेलों के प्रति जागरूक भी हैं उनके अपने गांव में वे अक्सर देशी खेलों का बड़ा आयोजन करते हैं। लेकिन हाल ही में भुजरियों के मेले में उनकी छवि को‌ परिभाषित करता रहूं पर सामने आया जहाँ उन्होंने अपने समर्थकों और आम जनता के साथ बंदूकों से जमकर फायरिंग की। सूत्रों के मुताबिक शिवपुरी के पिछोर विधानसभा में भुजरियों के मेले में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे और उन्होंने अपने विधायक प्रीतम लोधी के साथ खुलेआम फायरिंग की। इस घटना के वीडियो अक्सर देखने को नहीं मिलते हैं। और कहा ये भी जाता है कि यहाँ केवल चिड़ीमार बंदूकों से मटकी फोड़ प्रतियोगिता होती है लेकिन तस्वीरें बयान कर रही हैं कि यहाँ चिड़ीमार बंदूकें नहीं अपितु माउजर, 12 बोर दोनाली और विभिन्न प्रकार के हथियारों से फायरिंग की जा रही है। यहाँ इतनी बड़ी संख्या के बीच पुलिस भी है और प्रशासन भी लेकिन रोकने की हिम्मत किसी की नहीं है।गनीमत यह रही है कि अब तक किसी भी तरह की अनहोनी की सूचना नहीं मिली है। आपको बता दें‌ कि ये परम्परा कांग्रेस विधायक के पी सिंह द्वारा शुरू की गई थी। लेकिन बड़ा सवाल ये उठता है एक शादी समारोह में हर्ष फायरिंग करने पर एफआईआर दर्ज करने वाला पुलिस प्रशासन यहाँ आकर अपाहिज हो जाता है। क्या जनप्रतिनिधियों पर सत्ता का नशा‌ इस कदर काबिज है कि वे जब चाहें नियम कानून और व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दें। कहते भी हैं कि समरथ को नहिं दोष गुसाईं तो भैया ये सत्ता वाले समरथ हैं जिनका कोई दोष नहीं होता दोष होता है इन्हें वोट‌ देने वाली जनता का जो इन्हें सत्ता सिंहासन पर इसलिए विराजमान करती है कि ये जनता की समस्याएं हल हों उन्हें सुविधाएं मिलें। लेकिन ग्वालियर चम्बल अंचल की जनता भी कम नहीं है जो बंदूक का लायसेंस लेने को सबसे बड़ी सुविधा समझती है क्योंकि कहा जाता है कि घर में रोटी न हो लेकिन बंदूक और कारतूस होना जरूरी है।

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