सरकार की जनहितैषी योजनाओं की हकीकत
लाड़ली बेटियाँ सड़क पार लगा रहीं झाड़ू_मासूम नौनिहाल धकेल रहे कचरा गाड़ी

सो रहीं हैं सरकारें…….😥
मासूम बेटियों को नंगे पाँव झाड़ू से सुबह सुबह सड़क साफ करते और एक नौनिहाल को कचरा उठाने वाली ठेले को धकेलते हुए देखकर मन विचलित हो गया। क्या इसलिए हम सरकार चुनते हैं क्या यही दृश्य देखने के लिए संविधान में दलित और वंचितों को आरक्षण का प्रावधान रखा गया है। इन मासूम बेटियों और बच्चे को देखकर आज डॉ भीमराव अम्बेडकर की आत्मा चीत्कार कर रही होगी।

बड़ा सवाल यह है कि इन मासूमों का बचपन कौन छीन रहा है इनके स्वार्थी माँ बाप जो चंद रुपयों के लिए इन्हें एक ऐसे दल दल में धकेल रहे हैं जो इन्हें मैला उठाने का परम्परा से जिंदगी भर के लिए जोड़ देगा या फिर वो सरकारें जो इनके आर्थिक रूप से कमजोर माता पिता को जो दुनिया भर का कचरा मैला गंदगी उठाकर भी अपने बच्चों को बेहतर जिंदगी नहीं दे पा रहे। क्या इनके लिए समाज का कोई दायित्व नहीं बनता या फिर लोग जो इनके वर्ग के होकर भी इनके लिए नहीं सोच पाते। ये बेहद दुखद है कि सदियों से मैला उठाने वाले आज भी वही काम करने को मजबूर हैं और इनको बेहतर जिंदगी देने के दावे करने के नाम पर आंदोलन करने वाले चंद कथित रहनुमा हवाई जहाज और करोड़ों की गाडियों में घूम रहे हैं। या फिर कहाँ हैं वो जनप्रतिनिधि जो हर बार इनसे वोट माँगने आते हैं और फिर 5 साल के लिए इन्हें भूल जाते हैं।

आखिरी सवाल क्या हम अपने इन मासूम बच्चों को मैला उठाने झाड़ू लगवाने के लिए सरकार चुनते हैं….???
#क़लमकार_संजय
