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ग्वालियर में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की भेंट चढ़ी प्रसूता_पति को आया गुस्सा तो कर दी गाली गलौज

ग्वालियर में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खुली पोल,

भितरवार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ऑपरेशन थियेटर का बड़ा फेलियर_प्रसूता की जान पर बनी

भितरवार अस्पताल में लापरवाही का ‘ऑपरेशन’! प्रसूता की बिगड़ी हालत, पति का फूटा गुस्सा

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का ऑपरेशन थियेटर शुरू होते ही पहला ऑपरेशन विवादों के घेरे में आ गया है, प्रसूता की 6 दिन बाद भी हालत गंभीर होती जा रही हैं वहीं पति ने डॉक्टरों पर अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भितरवार में हाल ही में शुरू हुई ऑपरेशन थिएटर सेवा अब सवालों के घेरे में आ गई है। ओटी के शुभारंभ के साथ ही हतेंडा (जिला शिवपुरी) निवासी 27 वर्षीय गर्भवती महिला कल्पना पत्नी किशन सिंह का पहला प्रसव ऑपरेशन के जरिए किया गया था, लेकिन यही ऑपरेशन अब गंभीर विवाद की वजह बन गया है।

प्रसूता के पति किशन सिंह ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ऑपरेशन के छह दिन बाद उनकी पत्नी की हालत अचानक बिगड़ गई, तेज बुखार और गंभीर कमजोरी के बावजूद अस्पताल में न तो महिला डॉक्टर रात में देखने आईं और न ही कोई इमरजेंसी ड्यूटी डॉक्टर।

पीड़ित पति का आरोप है कि “दिन में सिर्फ औपचारिकता निभाने मैडम आ जाती थीं, लेकिन रात में मेरी पत्नी को देखने कोई नहीं आया। हालत बिगड़ती रही, लेकिन डॉक्टरों ने ग्वालियर रेफर तक नहीं किया।”

बताया जा रहा है कि जब स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई, तो मजबूर होकर पति अपनी पत्नी को बिना किसी आधिकारिक रेफरल के खुद ही ग्वालियर लेकर रवाना हुआ।

घटना के दौरान अस्पताल परिसर में हंगामा भी देखने को मिला। पत्नी की हालत को लेकर आक्रोशित पति ने डॉक्टरों पर गालियां बरसाईं और गुस्से में डॉक्टरों के पीछे-पीछे भागता नजर आया। अस्पताल में यह दृश्य अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर गया।

यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को आज भी समय पर और जिम्मेदार इलाज नहीं मिल पा रहा है।

अब बड़ा सवाल 

क्या भितरवार अस्पताल में शुरू हुई नई ओटी सुविधा मरीजों के लिए राहत बनेगी या लापरवाही का नया केंद्र?

वहीं दूसरी ओर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सचिन श्रीवास्तव ने अपने डॉक्टर्स का पक्ष लेते हुए पूरे मामले में प्रसूता और उसके परिजनों को ही दोषी ठहरा दिया है। लेकिन इस घटना ने गरीब और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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