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स्कूल ने एडमीशन को किया मना तो शिक्षा अधिकारी ने लिया संज्ञान

जनसुनवाई में पहुँची मासूम बच्ची की गुहार स्कूल में प्रवेश दिलाओ सरकार 

शिक्षा विभाग के योजना अधिकारी ने जनसुनवाई समाप्त होने के बाद की मासूम मदद

कुछ लोगों की पुकार शासन प्रशासन के सामने अनसुनी हो जाती है या कर दी‌ जाती है क्योंकि प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी समय-सीमा में बंधे होते हैं। हालांकि ये समय सीमा केवल आम जनता के लिए ही‌ निर्धारित की जाती है क्योंकि खास लोगों के लिए तो ये अधिकारी अपने पलक पांवड़े बिछा देते हैं। ऐसा ही हुआ कलेक्टर की जनसुनवाई में कि कलेक्टर महोदया सिर्फ अपने केबिन में ही समस्याओं को सुनने में यकीन रखती हैं। और जो फरियादी उनके केबिन तक नहीं पहुंच पाते उन्हें कलेक्टर के मातहत सुनकर भी अनसुना कर देते हैं। यही आज हुआ ग्वालियर कलेक्ट्रेट में कि कलेक्टर महोदया अपने व्यस्ततम समय में से चंद मिनट जनता के लिए निकाल नहीं पाईं और जनसुनवाई का समय खत्म होते ही सभी अधिकारियों ने अपनी रवानगी ले ली लेकिन ये मासूम अपनी फरियाद लिए खड़ी‌ रह गई इस पर किसी जिम्मेदार की नजर नहीं पड़ी।

आज मंगलवार को जनसुनवाई में एक मासूम बच्ची पहुँची। उसकी साथ आई परिजन का कहना था कि उसे किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जा रहा। यही नहीं इस लाड़ली लक्ष्मी को शासकीय स्कूल में भी प्रवेश नहीं दिया गया। कारण सिर्फ यह कि ये शायद चोटिल हो या फिर आंशिक दिव्यांग है।

ग्वालियर कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान की ये बेहद संवेदनशील तस्वीर नजर आई जब शिक्षा विभाग में कार्यरत एक योजना अधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने जनसुनवाई समाप्त होने के बाद भी फरियादियों की शिकायत सुनी और निराकरण का भरोसा दिया। दरअसल ग्वालियर की ये लाड़ली लक्ष्मी को किसी स्कूल में प्रवेश नहीं मिल रहा है स्कूल जाने का सपना लिए ये मासूम अपने परिवार के साथ कलेक्ट्रेट पहुँची लेकिन कलेक्टर समेत किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की नजर इस मासूम पर नहीं पड़ी चूँकि जनसुनवाई का समय खत्म हो चुका था तो समस्त अधिकारी और कर्मचारी समय पर अपनी कुर्सियों से उठ खड़े हुए। लेकिन जिला शिक्षा कार्यालय में योजना अधिकारी के पद पर कार्यरत राजेश श्रीवास्तव की नजर इस मासूम पर पड़ी तो उन्होंने इसे और इसके परिजनों को बुलाया और तसल्ली से इनकी बात सुनकर इन्हें समस्या को सुलझाने का आश्वासन दिया और अपना निजी मोबाइल नंबर भी दिया कि यदि कोई भी शासकीय स्कूल यदि इस बच्ची के प्रवेश के लिए मना करता है तो आप मुझे फोन करना। राजेश श्रीवास्तव ने कम्पू स्थित पागनवीसी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बच्ची को प्रवेश के लिए भेजा है। आपको बता दें कि प्रशासन में कितने अधिकारी ऐसे होते हैं जो लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से लेते हैं। हालांकि कभी कभी इस तरह के संवेदनशील अधिकारी भी प्रशासन में होने से कहीं न कहीं जनता को लाभ होता ही है अपितु प्रशासन की छवि सुधारने में ये बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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