
ग्वालियर में भगवान गणपति की विशाल प्रतिमा गिरी
भगवान यदि प्रधानमंत्री होते तो शायद सड़कों के गड्ढे भर जाते, जैसे प्रधानमंत्री के आने से पहले दो दिन में सड़कों को चकाचक कर दिया गया था। अधिकारियों को भगवान से नहीं सरकार से डर लगता है।यही वजह है कि प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को भगवान का बिल्कुल खौफ नहीं है। वैसे तो लोकतंत्र में जनता को भी जनार्दन कहा जाता है जिसका अर्थ होता है लोकतंत्र का भगवान लेकिन जनता तो हर रोज इन गड्ढों में गिरकर अपनी जान गंवाती है। चलिए वो भी ठीक है लेकिन मेरा एक सवाल है कि आजतक कोई अधिकारी या मंत्री या नेता सड़क के गड्ढों में गिरकर क्यों नहीं मरता…
यदि आपको इसका जवाब पता है तो जरूर दीजिएगा क्योंकि लोकतंत्र के असली भगवान आप हैं।
ये है पूरा मामला…
ग्वालियर में सड़कों के गड्ढों की चपेट में आम जनता के साथ अब भगवान भी आ रहे हैं ताजा मामला ग्वालियर के शिंदे की छावनी इलाके का है जहाँ के खल्लासी पुरा में स्थापित करने के लिए भगवान गणपति की विशाल प्रतिमा को ले जाते समय सड़क के एक गड्ढे में फँसकर बैलेंस खो बैठी। गणपति की प्रतिमा के गिरने के साथ ही मूर्ति ले जा रहे युवाओं ने हंगामा खड़ा कर दिया, मौके पर पहुँचे पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में किया, आक्रोशित युवाओं ने काफी देर तक हंगामा किया, बावजूद इसके कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचा, बहरहाल नगर निगम की उदासीनता से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं कि अब तक तो केवल इंसान ही सड़कों के गड्ढों से परेशान थे लेकिन अब भगवान भी हो रहे हैं।
