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कड़ाके की सर्दी में चाय बंद,9 बजे बाद शराब मिलेगी चाय नहीं

ग्वालियर के प्रभारी मंत्री का अनोखा फरमान,
सर्द रात में 9 बजे बाद चाय बंद, शराब शुरू

चाय नहीं शराब मिलेगी

खास रिपोर्ट इस वीडियो में

ग्वालियर में लगातार होती हत्याओं और बढ़ते अपराधों का सबसे बड़ा कारण चाय की गुमटी, पान‌ की दुकान और बीड़ी सिगरेट के खोके जो शहर के माफियाओं का नया ठिकाना बन गए हैं। गली मोहल्ले और कॉलोनी के कोने पर छोटी सी दुकान या ठेला रखकर किसी तरह अपनी रोजी रोटी चला रहे ये माफिया प्रशासन और पुलिस को कुछ नहीं देते। यह पुलिस की गालियां भी कहते हैं कई बार उनके ठेले और गुमटियों को नगर निगम प्रशासन नेस्तनाबूद कर देता है लेकिन ये कभी उफ़ नहीं करते। और यही एकमात्र वजह है कि चाहे पुलिस हो प्रशासन हो या नगर निगम इन सबका कहर इन गरीबों पर ही टूटता है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस चाय ने गुजरात के नरिया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बना‌ दिया वो चाय ग्वालियर के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट को अपराध की जड़ लग रही है लेकिन नशे की असली जड़ शराब पर उनकी और सरकार की मेहरबानियाँ लगातार बनी हुई हैं।

ताज़ा मामला जिले में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने का है जहाँ सड़कों गली मोहल्लों में गुमटी और ठेले लगाकर अपनी‌ रोजी रोटी कमाने वालों को रात 9 बजे तक ही काम करने की अनुमति दी गई है। यदि 9 बजे बाद कोई भी गुमटी दुकान या ठेला खुला दिखाई दिया तो पुलिस प्रशासन का कहर इन पर टूट पड़ेगा। हाँ एक बात और शराब पर कोई रोक नहीं है 24 घंटे शराब की सर्विस उपलब्ध है। वैसे तो साढ़े ग्यारह बजे तक शराब की दुकान को अनुमति दी गई है लेकिन आपको बैकडोर से शराब 24 घंटे मिलेगी। क्योंकि पुलिस प्रशासन और प्रभारी मंत्री को शराबी में कोई‌खराबी नजर नहीं आती।
जिले के‌ प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट ने दो दिन पहले हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ग्वालियर में बढ़ते अपराधों को लेकर केवल और केवल ये छोटी दुकानों वाले गरीब ही जिम्मेदार हैं। क्योंकि बड़े दुकानदार और शराब व्यापारियों से तो सरकार की रोजी रोटी चलती है। प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट को वैसे तो ग्वालियर से कुछ खास मतलब नहीं है। क्योंकि यहाँ उनके महाराज का राज है। लेकिन दिखावे के लिए ही सही लेकिन अधिकारी और जनता को अपने प्रभारी मंत्री की ठसक तो दिखानी ही पड़ेगी केवल इसीलिए मजबूरन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जताना पड़ता है कि मैं भी हूँ। वहीं अपराधोंं की असली जड़ नशे और शराब को सरकार और प्रशासन रोक नहीं पाएगा क्योंकि इस चीज से नेताओं के घर चलते हैं। और इसका सीधा उदाहरण किसी भी नेता के क्षेत्र में खुलेआम बिकते नशे की पुड़ियों में नजर आता है।

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