भारतीय किसान संघ का सरकारों पर बड़ा हमला,
किसान नहीं उद्योगपति व्यापारी और दलालों के लिए बनती हैं सरकारी नीतियाँ।
RSS के आनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ ने केंद्र और राज्य की सत्ताधारी सरकारों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि किसान हितैषी होने का दावा करने वाली सरकारों के केवल चुनाव के समय ही किसान की याद आती है और चुनाव के बाद किसानों की तरफ से मुँह फेर लेते हैं। किसान अपने काम करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों में रिश्वत देने को मजबूर होता है। यही नहीं बैंको के कर्ज के बोझ में दबे किसानों की आत्महत्या की खबरों से भी सरकार को फर्क नहीं पड़ता।
कृषि प्रधान देश का अन्नदाता सड़कों पर है और वो क्यों आज इस बात पर हम चर्चा करेंगे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषांगिक देश के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ताओं से। सरकारों का दावा है कि किसान की आय दोगुनी हुई है किसान खुशहाल हुआ है और अब सरकार किसान के घर जा रही है लेकिन क्या ये दावे सच हैं। आज सरकार के इन्हीं दावों की पड़ताल हम करेंगें कि किसान कितना खुशहाल हुआ है। लेकिन उससे पहले हम आपको कुछ तस्वीरें दिखाने जा रहे हैं खाद्य की कतारों में लगे किसान की, अपनी मांगों को मनवाने के लिए धरना प्रदर्शन करते किसान की और अपने कामों के लिए अफसरों के दरवाजों पर चक्कर लगाते किसान की। इन तस्वीरों से लगता यही है कि सरकार झूठी है सरकारी दावे झूठे हैं। यहाँ फसल कटने के बाद किसान को उसका सही मूल्य मिले या न मिले मंडी में बैठे दलाल आढ़तिए व्यापारी और उद्योगपति तो मालामाल हो जाते हैं। और किसान के हिस्से जो आता है वो उसकी मेहनत का दस प्रतिशत भी नहीं होता। तो देखिए हमारे देश के अन्नदाता की बेहद कड़वी जमीनी हकीकत की सच्ची लेकिन करुण कहानी।
