सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ लामबंद हुए पेंशनरों ने बनाई मानव श्रृंखला
अपनी मांगों को लेकर सरकार पर साधा निशाना
सरकारी नौकरी में देश प्रदेश और जनता की ज़िंदगी भर सेवा करने वाले रिटायर कर्मचारी अपने बुढ़ापे में सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों को लेकर सड़कों पर हैं। केंद्र सरकार द्वारा पारित वैलिडिटी पेंशन संशोधित नियम 2025 को रद्द करने और आठवें वेतनमान के गठन समेत कई अन्य पुरानी मांगों को लेकर ग्वालियर के पेंशनर्स ने मानव श्रृंखला बनाई। फॉर्म ऑफ़ सिविल पेंशनर्स एसोसिएशन कोऑर्डिनेशन कमेटी का पेंशनर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में हुए इस विरोध प्रदर्शन में सीसीए पेंशन संशोधन नियम 2025 को रद्द करने एवं टर्म्स आफ रेफरेंस तय करने की मांग को लेकर ग्वालियर के जयेंद्र गंज चौराहे पर मानव श्रृंखला बनाई गई वैलिडिटी पेंशन नियम रिटायरमेंट की तिथि के आधार पर दो पेंशनरों के बीच भेदभाव उत्पन्न करने वाला है इस नियम के तहत वेतन आयोग की सिफारिश से लागू होने के पहले और उसके बाद तय होने वाली पेंशन अलग-अलग तरीके से निर्धारित करने का अधिकार सरकार को दिया गया है जैसे किसी भी कोर्ट में चेलेंज नहीं किया जा सकता यह कानून के आर्टिकल 14 का स्पष्ट उल्लंघन करता है क्योंकि पेंशन कर्मचारी का अधिकार है वह किसी की दया पर निर्भर होने वाली कृपा नहीं है यह बात सुप्रीम कोर्ट द्वारा कही जा चुकी है वहीं आठवीं वेतन आयोग का गठन घोषणा के 7 महीने बाद भी नहीं किया जाना कर्मचारी और पेंशनर में आक्रोश पैदा कर रहा है मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ विभाजन की धारा 49(6) हटाने, लंबित 2% डी आर एरियर सहित तत्काल भुगतान, सेवानिवृत्ति दिनांक से आयुष्मान योजना का लाभ देने, पेंशनर की आय को इनकम टैक्स से मुक्त करने, रेल यात्रा में 50 पर्सेंट छूट प्रदान करने आदि की मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर करने हेतु फॉर्म ऑफ सिविल पेंशनर्स एसोसिएशन के बैनर तले रिटायर्ड कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया। इस धरने में राज्य सरकार के सभी विभागीय पेंशनर संगठन मौजूद रहे। अब देखना यह होगा की पेंशनर्स संगठनों की इन मांगों को लेकर सरकार कितनी गंभीर है या फिर उम्र भर देश की सेवा करने वाले कर्मचारियों की मांगें आम जनता की ही तरह अनसुनी ही रह जाती हैं।
