ग्वालियर, सरकार ने पढ़ लिख कर भी नहीं दी नौकरी तो लगाया ठेला,
नगर निगम ने वो भी छीना_अब जहर खाने को मजबूर,
सरकार निगम प्रशासन और किस्मत के सताए युवाओं की आपबीती।
ये युवा वो हैं जिन्हें देश बदलना था इन युवाओं की आँखों में पनप रहे सपनों का हत्यारा कौन है ये आज सबसे बड़ा सवाल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि एक वर्ष में दो चरोड़ नौकरी देंगे लेकिन वो चुनावी जुमला साबित हुआ या कहें कि प्रधानमंत्री और उनसे जुड़े लोगों भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने झूठ बोला। लेकिन अब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देश पर उच्च शिक्षित युवा जिन्होंने अपने माँ बाप की खून पसीने की कमाई से शिक्षा ग्रहण की लेकिन उन्हें नौकरी देना तो दूर जब ये शिक्षित बेरोजगार सरकारी सिस्टम से मायूस होकर अपने परिवार को पालने के लिए ठेला लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा लेकिन शासन प्रशासन और नगर निगम को ये पसंद नहीं आया और नगर निगम के तानाशाह कमिश्नर और उनकी टीम ने इन युवाओं से उनका रोजगार भी छीन लिया। और ये हुआ कुछ रसूखदार लेकिन निकृष्ट लाटसाहबों के निर्देश पर क्योंकि सूत्रों के मुताबिक कटोराताल इलाके में हाल ही में बने एक बेहद मँहगे रेस्टोरेंट की बिक्री इन ठेले वालों द्वारा सस्ता लेकिन हेल्थी फूड बेचने से प्रभावित हो रही थी तो हटवा दिया और ग्वालियर के बेरोजगार लेकिन शिक्षित युवाओं को ये संदेश भी दे दिया कि जो करना है कर लो हम तो ऐसा ही करेंगे। इस घटना की शिकायत करने ये युवा कलेक्ट्रेट पहुँचे तो होना ये था कि कलेक्टर द्वारा निगम के तानाशाहों से जवाब तलब किया जाता लेकिन जैसा कि पहले से विदित है कि पिछले काफी समय से कलेक्टर ग्वालियर रूचिका सिंह चौहान ने जनसुनवाई और जनता से एक निश्चित दूरी बना ली है तो नगर नगम के सताए ये युवा बेरोजगार उन्हें अपना दर्द सुना नहीं पाए और कलेक्टर साहिबा की गैरमौजूदगी में मातहत अफसरों ने एक बार फिर इन युवाओं को निरंकुश नगर निगम के हवाले कर दिया जहाँ कभी भी इनकी सुनवाई नहीं होगी ये तय है।
